ताड़ के फल से गूदा निकालने में क्रांति: बीएयू के नवोन्मेषी एक्सट्रैक्टर को मिला पेटेंट

प्रदीप विद्रोही,भागलपुर:बिहार कृषि क्षेत्र में नवाचार की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए बिहार एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (बीएयू) को अपने नवोन्मेषी मोटराइज्ड मैकेनिकल पामिरा पाम फ्रूट पल्प एक्सट्रैक्टर के लिए भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से डिज़ाइन रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। यह पंजीकरण Designs Act, 2000के तहत प्रदान किया गया है।

यह उपलब्धि मशीन की नवीनता, मौलिकता और औद्योगिक उपयोगिता को आधिकारिक मान्यता देती है तथा इससे कृषि अभियांत्रिकी के क्षेत्र में बीएयू की बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

इस तकनीक का विकास वैज्ञानिकों की एक बहु-विषयक टीम ने किया, जिसका नेतृत्व बीएयू के कुलपति दुनिया राम सिंह ने किया। टीम में सनोज कुमार, अशोक कुमार, आशीष कुमार,  प्रेम प्रकाश, मो वसीम सिद्दीकी और अनिल कुमार सिंह शामिल थे।

कुलपति सिंह ने बताया कि यह उच्च क्षमता वाला मोटर चालित समाधान ताड़ के फल से गूदा निकालने की पारंपरिक मैन्युअल प्रक्रिया की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। पारंपरिक विधि अधिक श्रमसाध्य, कम स्वच्छ और कम प्रभावी होती है, जिससे कटाई के बाद काफी नुकसान हो जाता है। ताड़ का यह फल वैज्ञानिक रूप से Borassus flabellifer के नाम से जाना जाता है।

नई विकसित मशीन एक बार में 50किलोग्राम तक फल को प्रोसेस कर सकती है। इससे गूदा निकालने में लगने वाला समय काफी कम हो जाता है और पल्प रिकवरी (गूदा प्राप्ति) की दक्षता भी बढ़ जाती है।

उन्होंने बताया कि यह प्रणाली कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ तेजी से गूदा निकालने, रेशे की मिलावट कम करने, श्रम की कठिनाई और थकान घटाने तथा बेहतर प्रोसेसिंग मानकों को बनाए रखने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

बीएयू के अनुसंधान निदेशक एके सिंह ने कहा कि मशीन को संचालन दक्षता और एर्गोनोमिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है, जिससे गूदा निकालने की प्रक्रिया तेज होती है और उत्पादन बढ़ता है। इससे प्रसंस्करण की आर्थिकता भी बेहतर होगी।

उन्होंने यह भी बताया कि इस पेटेंट पंजीकरण से तकनीक के व्यावसायीकरण और उद्योगों के साथ सहयोग को नई गति मिलने की संभावना है।

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