झारखण्ड उलगुलान संघ ने दिया धरना

खूंटी :आदिवासियों एवं मूलवासियों के हित के संवैधानिक प्रावधानों तथा कानूनी अधिकारों के कार्यान्वयन के प्रति झारखण्ड सरकार के उदासीन रवैये को लेकर झारखण्ड उलगुलान संघ के तत्वावधान में मंगलवार को जिला समाहरणालय, खूंटी के समक्ष एक दिवसीय धरना कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
             संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने धरना के माध्यम से झारखण्ड सरकार को याद दिलाते हुए कहा कि आबुआ सरकार कहने मात्र से झारखण्डियों का हक अधिकार सुरक्षित नहीं पाएगा, बल्कि जो संवैधानिक प्रावधान तथा कानूनी अधिकार प्राप्त है, उसको ठोस रूप से लागू करने का प्राथमिकता होना चाहिए था। लेकिन वर्तमान समय में सिर्फ सत्ता की राजनीति हो रही है। केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकार हो, लोगों को गुलाम बनाने पर तुली हुई है। मईया सम्मान योजना और गोगो दीदी योजना का प्रलोभन देकर जमीन और जंगल के हक अधिकार से ध्यान भटकाया जा रहा है। ग्राम सभा को अधिकार सम्पन्न बनाने वाले पेसा कानून को भी हेमंत सरकार लागू करना नहीं चाहती है, तभी तो जुलाई महीना में झारखण्ड हाईकोर्ट ने झारखण्ड सरकार दो महीना में पेसा कानून लागू करने का निर्देश दिया था लेकिन दो महीना बीत चुका झारखण्ड सरकार ने कुछ नहीं किया जबकि इस बीच झारखण्ड मंत्रीपरिषद की दो बैठकें हुई, उस बैठक में इस विषय पर चर्चा ही नहीं किया गया। इससे बड़ा दुर्भाग्य झारखण्डियों के साथ और क्या हो सकता है।
      सुबोध पूर्ति ने कहा कि झामुमो – कांग्रेस ने पिछले चुनाव के समय वादा किया था कि सरकार गठन के तुरंत बाद भूमि बैंक नीति और भूमि अधिग्रहण संशोधन (झारखण्ड) अधिनियम – 2017 को रद्द कर दिया जाएगा किन्तु पांच साल सरकार चलाने के बाद भी इस सरकार ने कुछ नहीं किया।
कुलन पतरस आईन्द ने कहा कि हेमंत सरकार झूठ और ठगने वाली सरकार है, लैंड पूल नीति बनाकर गाँव का अस्तित्व मिटाने का फरमान जारी किया है।
          बेनेदिक्त नवरंगी ने कहा कि जनजातीय उप योजना तथा डी एम एफ टी फंड का विषयगत उपयोग नहीं किया जाना इस सरकार की विफलता है।
           धरना को मुख्य रूप से मसीहदास गुड़िया, दामु मुंडा, जोन जुरसन गुड़िया, सलील कोनगाड़ी, प्रेम मानकी, पौलुस हेमरोम, अब्राहम सोय  एवं पौलुस मुंडू आदि ने सम्बोधित किया।

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