झारखण्ड में भी एक गाय में लंपी बीमारी की पुष्टि,चिकित्सा पदाधिकारी ने दी जानकारी
पलामू : राजस्थान,दिल्ली,यूपी के बाद अब झारखण्ड में भी गाय में लंपी बीमारी नामक वायरस की एंट्री हो गई है. ताजा मामला पलामू के सतबरबा का है. बलराम प्रसाद के गाय में लंपी बीमारी नामक वायरस की पृष्टि चिकित्सा पदाधिकारी ने की है।गाय का इलाज मवेशी डॉक्टर के देखरेख में चल रहा है। लंपी बीमारी के चपेट में आने वाले पशुपालकों को अपने पशुओं को इस बीमारी से बचाने के उपाय करने की सलाह दी गई है।गाय और भैंस यह वायरस पाया जा रहा है। यह संक्रमित करने वाली विषाणु जनित छुआछूत की बीमारी है। यह संक्रमित मक्खी, मच्छर और चमोकन के काटने से फैलता है। बीमारी से ग्रसित पशु स्वस्थ पशुओं को अपने चपेट में ले लेता है।
इधर बताया गया कि पोंची गांव के संजय मेहता के गाय में लंपी वायरस के लक्षण नही पाए गया है। फिलहाल संजय मेहता के गाय की स्थिति ठीक है। गाय बीमार होने के चलते संजय की परेशानी बढ़ गई थी।दूसरी ओर सतबरवा के बलराम प्रसाद की गाय में लंपी वायरस के लक्षण को देखते हुए आवश्यक हिदायत दी गई। सुई और दवा लगातार चलाने की सलाह बलराम प्रसाद को दी गई है।
उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक सुई के साथ दवा तथा अन्य प्रकार के एडवाइज चिकित्सक के द्वारा मिला है। वही मानासोती गांव के अंछु सिंह के गाय भी लंपी वायरस नामक बीमारी से ग्रसित होने के सूचना के चिकित्सा पदाधिकारी ने जांच की।
दूसरी और गॉड फॉक्स नामक बीमारी के चलते ग्राम नौरंगा की पूनम देवी की दो बकरियों की मौत हो चुकी है वही सुरेश साहू समेत कई लोगों के बकरियां बीमार है।पूनम के ससुर बिहारी ने बताया कि बकरियों के बीमार होने के बाद पशु चिकित्सक से इलाज कराया गया था लेकिन इलाज के दौरान दोनों बकरी की मौत हो गई। बकरियों के शरीर में फुंसी हो गया था।तेज बुखार तथा खाना पीना छोड़ दिए जाने का लक्षण था। चिकित्सकों ने गॉड फॉक्स बीमारी बताया था।
इधर सतबरवा, मेदिनीनगर और छतरपुर के प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ अनूप विलियम लकड़ा ने बताया कि ग्रसित मवेशियों के शरीर में गांठ पड़ना शुरू हो जाता है। बड़े-बड़े फोड़ा के तरह फुंसी तथा तेज बुखार और पैर में सूजन आ जाना तथा आंख से पानी गिरना बीमारी का मुख्य लक्षण लक्षण है। इसके बचाव का तरीका मवेशी पालकों को निभाना चाहिए।क्या है उपाय :
उन्होंने कहा कि लंपी डिजीज वायरस से ग्रसित मवेशियों को गोहाल में एक जगह पर एकत्र करके नहीं रखना है। यह बीमारी अधिकतर गाभिन गाय और भैंसों में होती है। बच्चा देने के उपरांत दोनों के थन का दूध बच्चा के पीने के बाद उसमें भी यह रोग लग जाता है। फिलहाल एक गाय में जांच करने के बाद लंपी बीमारी की पुष्टि की गई है।

