अगर द्रौपदी मुर्मू को झामुमो ने समर्थन दिया तो इसे सत्ता का प्लान बी समझिये..
रांची: महाराष्ट्र में चल रहे सियासी ड्रामे की चर्चा पूरे देश के नेता और आम जनता के बीच हो रही है. इसे देख कर राजनेता अपने नफा- नुकसान का आकलन करने में जुट गये हैं. इस बीच झारखण्ड में फिर एक बार ऑपरेशन लोटस शुरू होने की सूचना है. साथ ही यह सूचना भी मिल रही है कि अगर द्रौपदी मुर्मू को झामुमो ने समर्थन दिया तो उसे भी बदलाव का हिंट माना जायेगा।मांडर उप चुनाव परिणाम आने के बाद झारखण्ड की सियासी गतिविधि तेज हो जाएगी. यदि भाजपा ने इस सीट पर कमल खिला दिया तो ऑपरेशन लोटस को बल मिल जायेगा. वहीं कांग्रेस के सीट लूज करने के बाद प्रदेश में झामुमो और कांग्रेस के बीच दूरी बढ़ जाएगी. वैसे राज्यसभा चुनाव में ही इसकी आग लग चुकी है.यदि परिणाम कांग्रेस के पक्ष में नहीं आया तो निश्चित रूप से हेमंत सोरेन सरकार को परेशानी हो सकती है. वैसे झामुमो का बी प्लान भी तैयार है. कांग्रेस को आउट कर भाजपा को इन करा सकती है.लेकिन फिलहाल ऐसा होता दिख नहीं रहा है. कांग्रेस चाह कर भी हेमंत सोरेन सरकार से दूर नहीं जा सकती है.लेकिन कांग्रेस के कुछ विधायक ऑपरेशन लोटस के नजदीक जरुर जा सकते हैं. वहीं राजनीतिक जानकारों की मानें तो झारखण्ड में भाजपा का मिशन पिछले दो सालों से चल रहा है. पिछले कई उप चुनाव में भाजपा जीत कर भी हार रही है.लेकिन मांडर उप चुनाव में जीत के प्रति भाजपा ओवर कांफिडेंस दिखा रही है.इस उप चुनाव में भाजपा के नेताओं ने सभी तरह के नुक्से आजमा लिए हैं.मांडर सीट पर यदि भाजपा की प्रत्याशी जीत जाती है तो भाजपा का विधानसभा में 26 का अंक पूरा हो जायेगा. आजसू के 2 और दो से चार अन्य विधायक भी भाजपा के संपर्क में है. वैसे मांडर चुनाव परिणाम के बाद झामुमो भाजपा के साथ मिलकर सरकार भी बना सकती है. राष्ट्रपति चुनाव में अगर द्रौपदी मुर्मू को झामुमो ने दिया समर्थन तो इसे सत्ता के सियासी खेल का प्लान बी समझिए।ची : महाराष्ट्र में चल रहे सियासी ड्रामे की चर्चा पूरे देश के नेता और आम जनता के बीच हो रही है. इसे देख कर राजनेता अपने नफा- नुकसान का आकलन करने में जुट गये हैं. इस बीच झारखण्ड में फिर एक बार ऑपरेशन लोटस शुरू होने की सूचना है. साथ ही यह सूचना भी मिल रही है कि अगर द्रौपदी मुर्मू को झामुमो ने समर्थन दिया तो उसे भी बदलाव का हिंट माना जायेगा।
मांडर उप चुनाव परिणाम आने के बाद झारखण्ड की सियासी गतिविधि तेज हो जाएगी. यदि भाजपा ने इस सीट पर कमल खिला दिया तो ऑपरेशन लोटस को बल मिल जायेगा. वहीं कांग्रेस के सीट लूज करने के बाद प्रदेश में झामुमो और कांग्रेस के बीच दूरी बढ़ जाएगी. वैसे राज्यसभा चुनाव में ही इसकी आग लग चुकी है.यदि परिणाम कांग्रेस के पक्ष में नहीं आया तो निश्चित रूप से हेमंत सोरेन सरकार को परेशानी हो सकती है. वैसे झामुमो का बी प्लान भी तैयार है. कांग्रेस को आउट कर भाजपा को इन करा सकती है.लेकिन फिलहाल ऐसा होता दिख नहीं रहा है. कांग्रेस चाह कर भी हेमंत सोरेन सरकार से दूर नहीं जा सकती है.लेकिन कांग्रेस के कुछ विधायक ऑपरेशन लोटस के नजदीक जरुर जा सकते हैं.
वहीं राजनीतिक जानकारों की मानें तो झारखण्ड में भाजपा का मिशन पिछले दो सालों से चल रहा है. पिछले कई उप चुनाव में भाजपा जीत कर भी हार रही है.लेकिन मांडर उप चुनाव में जीत के प्रति भाजपा ओवर कांफिडेंस दिखा रही है.इस उप चुनाव में भाजपा के नेताओं ने सभी तरह के नुक्से आजमा लिए हैं.
मांडर सीट पर यदि भाजपा की प्रत्याशी जीत जाती है तो भाजपा का विधानसभा में 26 का अंक पूरा हो जायेगा. आजसू के 2 और दो से चार अन्य विधायक भी भाजपा के संपर्क में है. वैसे मांडर चुनाव परिणाम के बाद झामुमो भाजपा के साथ मिलकर सरकार भी बना सकती है.
राष्ट्रपति चुनाव में अगर द्रौपदी मुर्मू को झामुमो ने दिया समर्थन तो इसे सत्ता के सियासी खेल का प्लान बी समझिए।

