मैं भले आज मुख्यमंत्री के रूप में हूं पर मेरी पहचान आंदोलनकारी के बेटे के रूप में हैः सीएम
रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को केंद्र और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मैं भले आज मुख्यमंत्री के रूप में हूं पर मेरी पहचान आंदोलनकारी के बेटे के रूप में है. ये पहचान मेरी सबसे बड़ी पहचान है. पता नहीं मेरे प्रतिद्धंवदियो को उनसे क्या परेशानी है. जब चुनावी राजनीति में नहीं सके तो अब केंद्रीय जांच एजेंसियो के माध्यम से उन्हें काम करने से रोका जा रहा है। वे शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन में आयोजित आंदोलनकारियों के चिन्हितीकरण कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस अवसर पर झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन, झारखंड आंदोलनकारी आयोग के अध्यक्ष दुर्गा उरांव, विधायक राजेश कच्छप, सुदीप्त सोनू, मंत्री बादल पत्रलेख, मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, विनय चौबे सहित कई लोग मौजूद थे। सीएम ने कहा कि आजादी से आज तक खनन के बकाए केंद के पास है. एक लाख 36 हजार करोड़ बकाया है. केंद्र सरकार इस राशि का ब्याज भी दे दे तो राज्य को बैंगलुरु और हैदराबाद जैसा बना देंगे. सरकार बनने के बाद कोरोना झोली में आया बाबजूद विकास के रफ्तार बढ़ाये गये, लेकिन संवैधानिक संस्था रोकने में जुटी है. हमलोगों को पीछे धकेलना चाहती सीएम ने कहा कि राज्य में ऐसे लोग कुर्सी पर बैठे जिनको अलग राज्य की लड़ाई से कोई मतलब नही था. हम एक एक बात का जवाब देंगे. हमने कई तरह से राज्य हित मे निर्णय लिया. हमारे प्रतिद्वंद्वी को किस बात का डर है हम जानते है. इनको लगता है कि ये लड़का ज्यादा दिन कुर्सी पर रह गया तो उनके दिन लद जाएंगे. हम अधिकार की लड़ाई में पीछे नही हटते हैं. लंबे आंदोलन के बाद अलग राज्य मिला. किन मुसीबतों से आंदोलनकारियों ने ये लड़ाई लड़ी है. जब गुरुजी ने अलग राज्य की बात कही थी तो लोग इस बात की हंसी उड़ाते थे. जैसे देश की आजादी की कहानी है वैसे ही इस राज्य की आजादी की कहानी है. इनलोगों ने सपनो को साकार किया. घर परिवार नौकरी छोड़ लोगो ने आंदोलन किया. राज्य मिला पर इन्हें इनकी पहचान नही मिला. मात्र दो हजार लोगों को पेंशन मिलता है यह गलत था. चिन्हितिकरण की प्रक्रिया इतनी जटिल थी कि लोग परेशान थे. हमने नए सिरे से चिन्हितिकरण का काम शुरू किया. आंदोलन के पहली पंक्ति से आखरी पंक्ति तक के लोग चिन्हित होंगे.
सीएम ने और क्या कहा
अब झारखंड में झारखंड आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को साढ़े तीन हजार से लेकर 7 हजार रूपया तक पेंशन दिया जाएगा.
जेल में या आंदोलन में मारे गए झारखंड आंदोलनकारियों को नौकरी मिलेगा. 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा.
राज्य में 5000 मॉडल स्कूल का निर्माण किया जायेगा. जिला स्तर पर कार्य चल भी रहा है. जो पढ़ाई डीएवी और डीपीएस जैसे स्कूलों में होते हैं वही पढ़ाई मॉडल स्कूलों में भी होगी.
इन स्कूलों को स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, स्टेम लैब समेत पठन-पाठन के विभिन्न अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा.
पुलिस फायरिंग या जेल में मृत या दिव्यांग हुए आंदोलनकारियों के आश्रित परिवार के एक सदस्य को राज्य सरकार के तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय पदों पर सीधी नियुक्ति करेगी.
अन्य आदोनकारियों के एक आश्रित के लिये तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय पदो पर सरकारी नियुक्ति में पांच प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिया जायेगा.
जेल में संयमन एवं मृत्यु होने पर आंदोलनकारी या उनके एक आश्रित को जीवनकाल तक सम्मान पेंशन दिया जायेगा.
जेल में तीन माह से कम रहने पर 3500 रुपये प्रतिमाह, तीन माह से छः माह के बीच रहने पर 5000 रुपये प्रतिमाह और छः माह से अधिक रहने पर 7000 रुपये प्रतिमाह का लाभ दिया जायेगा.
झारखंड आंदोलन में योगदान देने वाले सभी लोग एवं उनके आश्रित, आश्रित की श्रेणी में संबंधित आंदोलनकारी की पत्नी, पुत्री, अविवाहित पुत्री, पुत्र की विधवा पत्नी, आंदोलनकारी महिला के पति, आंदोलनकारी के पौत्र, पौत्री इसके पात्र होंगे. लाभुक आंदोलनकारी चिन्हितीकरण आयोग के राज्य स्तरीय कार्यालय और संबंधित जिला उपायुक्त का कार्यालय में इसके लिये आवेदन करेंगे.

