विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला की तैयारी को लेकर हुई उच्च स्तरीय बैठक

भागलपुर।विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2025 की तैयारी को लेकर बिहार के मुख्य सचिव श्री अमृत लाल मीणा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी विभागों की तैयारियों को लेकर एक-एक कर फीडबैक लिया गया।

उल्लेखनीय है कि श्रावणी मेला के दौरान भागलपुर, बांका, मुंगेर, बेगूसराय, पूर्णिया, जमुई, मधुबनी, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, वैशाली, सारण, मुजफ्फरपुर, रोहतास और जहानाबाद जिलों से होकर श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए यात्रा करते हैं और विश्राम करते हैं। इनमें भागलपुर, बांका एवं मुंगेर के रास्ते श्रद्धालु बाबा अजगैबीनाथ से उत्तरवाहिनी गंगा का जल लेकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक करते हैं। वहीं पहलेजा से गंगाजल लेकर श्रद्धालु बाबा गरीबनाथ पर जलाभिषेक करते हैं।

भागलपुर से जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि यहां की सारी तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं और 30 जून तक सभी कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे। सुलतानगंज के जहाज घाट और सीढ़ी घाट से श्रद्धालु जल उठाते हैं, जहां सफाई और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की गई है। सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) के माध्यम से कराया जा रहा है। घाटों पर जालीयुक्त बैरिकेडिंग कराई जाती है, साथ ही SDRF की टीम और गोताखोरों की प्रतिनियुक्ति भी की गई है।

धांधी बेलारी में प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, वहीं जहाज घाट पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। कच्ची कांवरिया पथ पर बालू बिछाया जाता है, जिसके लिए बालू का भंडारण आवश्यक है। गर्मी के मौसम में हर दो घंटे पर पानी का छिड़काव भी जरूरी होता है।

इस संदर्भ में पथ निर्माण विभाग द्वारा बताया गया कि कई स्थलों पर बालू का भंडारण कर लिया गया है और कांवरिया पथ में 25 स्थानों पर पानी के टैंकर की व्यवस्था कर दी गई है, जिससे नियमित रूप से छिड़काव किया जाएगा।

एसएसपी हृदय कांत ने बताया कि श्रावणी मेला के दौरान भीड़ और यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती होती है। इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की गई है। विशेषकर गुरुवार, रविवार और सोमवार को भीड़ अधिक होती है, और श्रावणी मेला समाप्त होने के बाद भी 15 दिनों तक श्रद्धालु जल लेकर देवघर जाते हैं। ऐसे में पुलिस बल की तैनाती 45 दिनों के लिए की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य जिलों से आने वाली गाड़ियों पर श्रद्धालु ऊपर बैठ जाते हैं, जिससे गाड़ियों की ऊँचाई बढ़ जाती है और विद्युत तारों से संपर्क में आने पर दुर्घटनाएं हो सकती हैं। विगत वर्ष भी ऐसी दुर्घटना हो चुकी है, इसलिए इस पर नियंत्रण संबंधित जिलों में ही किया जाना चाहिए।

मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक, बिहार द्वारा सभी जिला परिवहन पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने जिले में मोटर वाहन संगठनों के साथ बैठक कर उन्हें इस खतरे से अवगत कराएं। साथ ही, इसका प्रचार-प्रसार भी करें कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 और 191 के अंतर्गत यह एक दंडनीय अपराध है, जिसमें ₹5000 से ₹10000 तक का जुर्माना तथा 6 महीने से 2 वर्ष तक की कैद का प्रावधान है।

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