HEC पुनर्वासित भूमि मामले की होगी उच्चस्तरीय जांच, तीन माह में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश
रांची: हटिया स्थित भारी इंजीनियरिंग निगम की स्थापना से जुड़े पुनर्वासित गांवों की जमीन में कथित अनियमितताओं का मामला अब जांच के दायरे में आ गया है। कांग्रेस विधायक दल के उप नेता राजेश कच्छप ने इस संबंध में पत्र लिखकर सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार की द्वितीय पंचवर्षीय योजना के तहत तीव्र औद्योगिकीकरण के दौर में 1894 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अंतर्गत तत्कालीन दक्षिणी बिहार के रांची क्षेत्र में HEC स्थापना के लिए 13 गांव पूर्ण रूप से तथा 22 गांव आंशिक रूप से विस्थापित हुए थे। इनमें राजस्व ग्राम लटमा के ग्रामीणों को वर्ष 1961-63 के दौरान मौजा हेथु (थाना संख्या-298) में पुनर्वासित किया गया था।
विधायक ने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 से 2025 के बीच अधिग्रहित भूमि पर कुछ भू-माफियाओं, अधिकारियों और कर्मियों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा कर पुनर्वासित जमीन को निजी बताकर ऑनलाइन रसीद और निबंधन किए जाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे हजारों रैयतों में भय और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
सरकार की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया है कि मौजा हेथु की पुनर्वासित भूमि पर HEC विस्थापित रैयतों की जमाबंदी दर्ज है और नियमित रूप से रसीद निर्गत की जा रही है। इस भूमि की खरीद-बिक्री के आधार पर नामांतरण नहीं किया जा रहा है तथा फिलहाल ऐसे किसी आवेदन की जानकारी विभाग को प्राप्त नहीं हुई है।
राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने मामले की जांच के लिए जिला स्तरीय जांच समिति गठित कर उपायुक्त रांची को तीन माह के भीतर जांच प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश दिया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



