गणादेश खासः चंद्रप्रकाश ने कांटा इंचार्ज से सांसद तक का तय किया है सफर
सियासत के अखाड़े में चंद्रप्रकाश का कोई सानी नहीं,
रामगढ़ को जिला बनाने के आंदोलन से मिली पहचान,
आजसू में जिला संयोजक से लेकर तय किया पार्टी उपाध्यक्ष तक का सफर,झारखंड सरकार में पांच बार रह चुके हैं मंत्री
रांचीः सियासत के अखाड़े में गिरिडीह के सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी का कोई सानी नहीं है। तमाम झंझावतों को झेलते हुए राजनीति में आगे बढ़ते चले गए। चंद्रप्रकाश ने विनोबा भावे यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में स्नातक किया. उसके बाद सीसीएल के रजरप्पा कोलियरी में कांटा इंचार्ज के रूप में काम किया. उसी दौरान इनका झुकाव सियासत की ओर हुआ.असल पहचान रामगढ़ को बनाने के लिए हुए आंदोलन से मिली। जिसमें चंद्रप्रकाश चौधरी की अहम भूमिका रही। इस आंदोलन के कारण 2004 में हजारीबाग से अलग होकर रामगढ़ नया जिला बना. हालांकि इससे पहले झारखंड अलग राज्य के लिए भी उन्होंने संघर्ष किया. झारखंड आंदोलन के दौरान वह 1988-89 में जेल भी गये.
जिला संयोजक से पार्टी उपाध्यक्ष का सफर
सियासत में आने के बाद चंद्रप्रकाश चौधरी आजसू पार्टी का दामन थामा. 2000 से 2003 तक वह पार्टी के हजारीबाग जिला संयोजक रहे. 2003 से 2005 तक हजारीबाग जिलाध्यक्ष के रूप में काम किया. 2005 में उन्हें पार्टी का केन्द्रीय कोषाध्यक्षक बनाया गया. इस पद पर वह 2008 तक बने रहे. 2009 में चंद्रप्रकाश चौधरी को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया. फिलहाल वह इस पद पर बने हुए हैं.
झारखंड सरकार में पांच बार रह चुके हैं मंत्री
सीपी चौधरी पहली बार 2005 में रामगढ़ सीट पर आजसू के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े और जीते. उसके बाद 2009 और 2014 में भी उन्हें लगातार जीत हासिल हुई. 2005 में सीपी चौधरी पहली बार अर्जुन मुंडा की सरकार में भू- राजस्व मंत्री बने. फिर 2006 में मधु कोड़ा की सरकार में विज्ञान प्रोद्यौगिकी मंत्री रहे. 2009 में शिबू सोरेन की सरकार में जल संसाधन विभाग बतौर मंत्री संभाला. 2010 में एक बार अर्जुन मुंडा की सरकार में भवन निर्माण मंत्री बने. पांचवी बार रघुवर दास की सरकार में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का जिम्मा मिला। सीपी चौधरी झारखंड विधानसभा में पार्टी विधायक दल के नेता भी रहे। हालांकि चंद्र प्रकाश चौधरी हजारीबाग से लोकसभा का चुनाव 2009 में लड़ चुके हैं. लेकिन हार गए थे.
राजनीति वाला रहा है पारिवारिक बैकग्राउंड
चंद्रप्रकाश चौधरी का पारिवारिक बैक ग्राउंड राजनीति वाला रहा है। उनका जन्म 18 अगस्त 1967 को रामगढ़ के रजरप्पा के सांडी गांव में हुआ. उनके पिता का नाम रीझू नाथ चौधरी और माता का नाम कलावती चौधरी है. सुनीता चौधरी से इनकी शादी हुई, जिनसे दो पुत्र ईषान व पीयूष और एक पुत्री सोनल प्रिया है. पिता रीझू नाथ चौधरी जनसंघ से जुड़े हुए थे और तीन बार विधानसभा का चुनाव लड़े. लेकिन जीत नहीं पाए.
लोकसभा में झामुमो के टाइगर को दी पटखनी
चंद्रप्रकाश ने रांगढ़ छोड़ गिरिडीह सीट से आजसू के बैनर तले लोकसभा का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने जेएमएम के जगरनाथ महतो को भारी मतों से हराया। . चंद्रप्रकाश चौधरी को 648277 और जगरनाथ महतो को 399930 वोट मिले. सियासत की इतनी समझ रही कि पहले से ही गिरिडीह में ग्राउंड लेवल पर काम किया। इसकी वजह से सीटिंग सांसद रवीन्द्र पांडेय का टिकट कट गया. और आजसू ने चंद्रप्रकाश चौधरी को मैदान में उतारा.

