गणादेश खासः 8 अरब की वन भूमि निजी और सार्वजनिक कंपनियों के हवाले, फिर भी प्रोजेक्ट पूरे नहीं
रांचीः झारखंड के जंगल की जमीन विकास योजनाओं के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के प्रोजेक्टों के लिए दी गयीं. प्रोजेक्ट के लिए जमीन भी मिली, लेकिन परियोजनाएं अब तक अधर में हैं. अब तक सरकारी और निजी क्षेत्र के प्रोजेक्ट के लिए लगभग आठ अरब 68 करोड़ की भूमि दे दी गयी है. बाजबूद इसके स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना, उत्तरी कोयल, शंख, दूब क्षेत्र सहित अन्य जलाशय योजनाएं अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं. जमीन मिलने के बावजूद विभिन्न उद्योगों के जुड़े प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू नहीं हो पाया है. वर्तमान में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने मौजूदा मूल्य प्रति हेक्टेयर 6.20 से 9.80 लाख रुपये तय की है.
खनन प्रोजेक्ट में चली गई 4 अरब 34 करोड़ की वन भूमि
खनन प्रोजेक्ट में लगभग चार अरब 34 करोड़ रुपये की वन भूमि चली गयी. लेकिन अब भी 39 खदानें फॉरेस्ट क्लीयरेंस के पेंच में फंसी हुई हैं. इन खदानों से अब तक खनन शुरू नहीं हो पाया है. खनन के लिए अब तक 7000 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है. वहीं निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने 14 हजार हेक्टेयर वन भूमि अधिग्रहित की है.
माइनिंग कंपनियों ने नहीं किया आदेश का पालन
सारंडा, कोल्हान और पोड़ैयाहाट के जंगल क्षेत्र में माइनिंग कंपनियों को ड्राफ्ट तैयार करने का निर्देश सरकार ने दिया था. इसके लिए एक कमेटी बनी थी. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सारंडा, कोल्हान और पोड़ैयाहाट एशिया के बेहतर जंगलों में से एक है. इन जंगलों में जानवरों के साथ कई प्रजातियों के पेड़-पौधे हैं. इनकी सुरक्षा के लिये माइनिंग कंपनियों को जरूरत के हिसाब से ही आयरन ओर निकालने की जरूरत है. फिलवक्त इन तीनों जंगल क्षेत्र में 16 माइनिंग कंपनियां काम कर रही हैं.
किस प्रोजेक्ट के लिए कितनी जमीन, कीमत करोड़ में
सिंचाई परियोजना- 5000 हेक्टेयर- तीन अरब 10 करोड़
सड़क निर्माण- 250 हेक्टेयर- 15.50 करोड़
ट्रांसमिशन लाइन- 430 हेक्टेयर- 26.66 करोड़
रेलवे- 1100 हेक्टेयर- 68.20 करोड़
खनन- 7000 हेक्टेयर- 4 अरब 34 करोड़

