नवगछिया में भीषण कटाव: 70 से 75 मीटर तटबंध ध्वस्त, ग्रामीणों में हड़कंप, कहलगांव में गंगा का जलस्तर 9 सेमी नीचे
भागलपुर। जिले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत गोपालपुर प्रखंड के इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध पर रविवार देर शाम गंगा नदी के जलस्तर में गिरावट के बाद अचानक भीषण कटाव शुरू हो गया। यह कटाव स्पर संख्या-9 के पास हुआ, जहां डाउनस्ट्रीम में लगभग 70 से 75 मीटर तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया।
इस अप्रत्याशित घटना से क्षेत्र में अफरातफरी मच गई और जल संसाधन विभाग में भी हड़कंप की स्थिति उत्पन्न हो गई। सूचना मिलते ही कनीय अभियंता रविंद्र कुमार और सहायक अभियंता अमितेश कुमार मौके पर पहुंचे और कटाव रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई शुरू की। उन्होंने उच्चाधिकारियों को स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया।
रात में राहत कार्यों में आई बाधा :
जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर तत्काल फ्लड फाइटिंग के तहत एनसी बॉडी गिराने का निर्देश दिया। हालांकि अंधेरा और पानी का दबाव होने के कारण रात में राहत कार्यों में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा।
विशेष उल्लेखनीय है कि उक्त स्पर संख्या-9 पर 145 मीटर लंबी बोल्डर क्रेटिंग का निर्माण कार्य एवरग्रीन कंपनी द्वारा छह करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया गया था, जो 30 जून तक पूरा कर लिया गया था। लेकिन गंगा में जलस्तर बढ़ने के मात्र 27 दिनों के भीतर यह निर्माण कार्य पूरी तरह से ध्वस्त हो गया, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों ने जताई गुणवत्ता पर आशंका, जांच की मांग :
कटाव से प्रभावित ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गहरा रोष जताया है। उनका आरोप है कि जल संसाधन विभाग की क्वालिटी कंट्रोल टीम सिर्फ औपचारिक निरीक्षण करती है, जिससे ठेकेदारों को घटिया निर्माण करने और सरकारी धन का दुरुपयोग करने का अवसर मिल जाता है।
ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है ताकि जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो सके।
कार्यपालक अभियंता ने आश्वासन दिया है कि कटाव रोधी कार्यों को शीघ्र ही तेज गति से शुरू किया जाएगा। हालांकि फिलहाल गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर बह रहा है, जिससे स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है।
कहलगांव में जलस्तर में गिरावट, पर अब भी अलर्ट जारी :
दूसरी ओर, कहलगांव क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है और अब यह खतरे के निशान से 9 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। हालांकि, यह चेतावनी स्तर से अब भी 92 सेंटीमीटर ऊपर है।
गंगा के साथ-साथ इसकी सहायक नदियाँ जैसे कुआ, घोघा, गेरूआ और भैना का जलस्तर भी धीरे-धीरे कम हो रहा है। चौर और निचले इलाकों में फैले बाढ़ के पानी का निकास अब तेज़ी से हो रहा है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में थोड़ी राहत मिली है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, रविवार रात आठ बजे तक गंगा का जलस्तर 31 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से नीचे है। यहाँ जलस्तर में प्रति घंटे लगभग एक सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की जा रही है।
कृषि को हो रहा नुकसान, कटाव से उपजाऊ जमीन बह रही :
जलस्तर में उतार-चढ़ाव के साथ कटाव की रफ्तार भी बदल रही है। कुछ स्थानों जैसे तोफिल महंत बाबा स्थान और अनठावन गांव में कटाव की गति धीमी है, जबकि अन्य इलाकों में यह तेज़ बनी हुई है।
मुखिया प्रतिनिधि संजय मंडल के अनुसार, कटाव के कारण किसानों की उपजाऊ भूमि बह रही है। मजबूरी में किसान मक्का और अन्य फसलों की कटाई कर पौधों को मवेशियों के चारे के रूप में उपयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जलस्तर और गिरता रहा तो कटाव की गति और अधिक तेज हो सकती है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।पीरपैंती पंचायत के सर्वाधिक कटाव टपुआ गांव के ग्रामीण कई वर्षों से स्थाई रूप से निजात पाने के लिए बाट जोह रही है। पिछले कई सालों से कटाव का दंश झेलते आये हैं। टपुआ गांव के दो वार्ड गंगा कटाव की भेंट चढ चुका है। टपुआ गांव के पश्चिमी हिस्से रुक – रुक कर कट ही रहा है। गंगा का जलस्तर घटने के क्रम में यह कटाव और ही विकराल हो जाता है।



