पीरपैंती में चमकेगी बिजली, बदलेगी तक़दीर,राज्य का सबसे बड़ा पावर प्लांट तैयारियों की अंतिम दहलीज़ पर, चीफ सेक्रेटरी ने लिया जायज़ा
भागलपुर :जहां अब तक झाड़ – जंगलों की पहचान थी, वहां अब गूंज रही है साहबों के वाहनों की आवाज़। बिहार के ऊर्जा मानचित्र पर पीरपैंती अब सिर्फ एक प्रखंड नहीं, सपनों की ऊर्जा नगरी बनने जा रहा है।
करीब 1200 एकड़ भूमि पर बनने जा रहा यह पावर प्लांट बिहार का सबसे बड़ा बिजली उत्पादन केंद्र होगा। तीन यूनिटों में 800-800 मेगावाट की क्षमता से कुल 2400 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसमें लगभग 1020 एकड़ ज़मीन 915 किसानों की रैयती भूमि है, जबकि बाकी बिहार और भारत सरकार की जमीन है।
सबसे बड़ी बात यह कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अंजाम देगा अडानी पावर। हाल ही में कंपनी को लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) जारी किया गया है। लगभग 29 हज़ार करोड़ रुपये (3 अरब अमेरिकी डॉलर) के निवेश से यह प्लांट तैयार होगा। परियोजना पूरी होने के बाद अडानी पावर बिहार की विद्युत कंपनियों को 2274 मेगावाट स्वच्छ बिजली आपूर्ति करेगा। राज्य मंत्रिमंडल ने इस भूमि को 33 साल की लीज़ पर उपलब्ध कराने की मंजूरी दी है।
निरीक्षण के दौरान ऊर्जा सचिव ने अडानी पावर के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि तीन वर्षों में हर हाल में यह परियोजना पूरी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पावर प्लांट बिहार को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में ले जाएगा और भागलपुर समेत पूरे प्रदेश के लिए औद्योगिक विकास, रोज़गार सृजन और आर्थिक प्रगति का नया अध्याय लिखेगा।
मंगलवार को जब मुख्य सचिव मनोज कुमार और ऊर्जा विभाग के एमडी महेन्द्र कुमार हेलीकॉप्टर से 2400 मेगावाट पावर प्लांट स्थल सीधे उतरे, तो इलाके की धड़कनें तेज़ हो गईं। जिला प्रशासन, पुलिस कप्तान और अडानी ग्रुप के प्रतिनिधियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।
“यह सिर्फ प्लांट नहीं, बिहार के लिए नया युग है” – मुख्य सचिव
ट्रायसम भवन में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों से दो टूक कहा – “अक्टूबर तक पेयरिंग का काम हर हाल में पूरा हो और प्रोजेक्ट अडानी ग्रुप को सौंपा जाए। यह प्लांट बिहार की ऊर्जा ज़रूरतें ही नहीं, उसकी बेरोजगारी की समस्या का भी समाधान देगा।” सीएस का दावा था कि इस प्लांट के चालू होते ही न सिर्फ हज़ारों युवाओं को रोज़गार मिलेगा, बल्कि पूरे इलाके की तस्वीर और तक़दीर दोनों बदलेंगी।
उम्मीदों की नई लहर: ठेके से टेक्नोलॉजी तक पहुंचेगा गांव का युवा
ग्रामीणों की आंखों में चमक है। अब तक जो युवा ईंट, बालू और ठेकेदारी तक सीमित थे, उन्हें लगता है कि अब टेक्निकल स्किल और स्थायी नौकरी की बात भी ज़मीन पर उतर रही है।
डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने भी स्पष्ट किया – “कुछ छोटे मुद्दे हैं जिन्हें जल्द निपटाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट न केवल ऊर्जा देगा, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का रास्ता भी खोलेगा।”
स्थानीय नेताओं की मांग – रोज़गार में प्राथमिकता मिले युवाओं को
निरीक्षण के दौरान ज़िप उपाध्यक्ष प्रणव उर्फ पप्पू यादव, प्रखंड प्रमुख रश्मि कुमारी, जदयू अध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता और सोनी देवी से भी बातचीत हुई। सभी ने एक स्वर में स्थानीय युवाओं को नौकरी में प्राथमिकता देने की मांग रखी। अडानी ग्रुप ने भरोसा दिलाया कि योग्यता के साथ स्थानीयता भी एक पैमाना होगा।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम, लेकिन माहौल में दिखा उत्सव जैसा उत्साह
मुख्य सचिव के आगमन को देखते हुए पुलिस-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद था। चप्पे-चप्पे पर निगरानी, चेकिंग और नाकेबंदी की गई, लेकिन इन सबके बीच गांव-देहात में एक अनकही खुशी दिखी। लोग दूर से हेलीकॉप्टर की उड़ान देख रहे थे।
अब सबकी निगाहें उद्घाटन की तारीख पर
हालांकि उद्घाटन की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन विभागीय तैयारियां अपने अंतिम दौर में हैं। कहा जा रहा है कि अगले कुछ ही हफ्तों में यहां बिजली का स्विच ऑन होगा और साथ ही हज़ारों सपनों का करियर ऑन। यह सिर्फ पावर प्लांट नहीं, पूर्वांचल का भविष्य है। यहां से निकलेगी रौशनी-सिर्फ बल्बों के लिए नहीं, ज़िंदगियों के लिए।



