झारखंड में बिजली ऑउट ऑफ कंट्रोल, सभी जिलों में लोड शेडिंग
साल दर साल घटता ही गया बिजली का उत्पादन
2013-14 में खरीदी जा रही थी 3014.08 करोड़ की बिजली, अब खर्च हो रहे हैं 7000 करोड़
रांचीः झारखंड में बिजली आपूर्ति की आउट ऑफ कंट्रोल वाली स्थिति बनी हुई है. इस तपती गर्मी में हर जिले में तीन से चार घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रह रही है. राजधानी में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए अंडरग्राउंड केबलिंग प्रोजेक्ट की शुरूआत लगभग छह साल पहले की गई थी, लेकिन इससे भी अब तक बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है. निर्बाध बिजली सप्लाई देने के लिए अंडरग्राउंड केबलिंग के लिए 395 करोड़ का प्रोजेक्ट पॉलिकैब एजेंसी को सौंपा गया था.
घटता ही गया साल दर साल उत्पादन
प्रदेश की बिजली व्यवस्था सेंट्रल सेक्टर और निजी कंपनियों के भरोसे टिकी हुई है. पांच साल पहले राज्य के पावर प्लांट टीवीएनएल, पतरातू और सिकिदिरी से लगभग 600 मेगावाट उत्पादन होता था. जिसमें टीवीएनएल से 370 मेगावाट, सिकिदिरी से 120 मेगावाट और पतरातू के पुराने पावर प्लांट से 120 मेगावाट बिजली मिलती थी.
झारखंड में 2500 मेगावाट बिजली की कमी
झारखंड में लगभग 2500 मेगावाट बिजली की कमी है. खुद ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 2022 में 5696 मेगावाट बिजली की जरूरत है. जबकि राज्य के पांचों लाइसेंसी लगभग 3255 मेगावाट ही बिजली की आपूर्ति करते है. डीवीसी 946, जुस्को 43, टाटा स्टील 435, सेल बोकारो 21 और बिजली वितरण निगम 1200 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करते हैं. इसके अलावा अन्य स्त्रोतों से भी बिजली ली जाती है.
क्या हुआ था छह साल पहले करार
पतरातू के नए पावर प्लांट को लेकर छह साल पहले हुए करार के मुताबिक, 2019 तक 800 मेगावाट की तीन यूनिटों से उत्पादन शुरू हो जायेगा. कुल 2400 मेगावाट बिजली मिलती. लेकिन 2022 तक उत्पादन शुरू नहीं हो पाया। करार के मुताबिक, इस प्लांट से 85 फीसदी बिजली राज्य के खाते में आयेगी. मतलब 3400 मेगावाट बिजली 2.73 रुपये प्रति यूनिट की दर से राज्य को मिलेगी. इस हिसाब से सरकार को लगभग 3000 करोड़ की बचत होती.
6420.43 मिलियन यूनिट बिजली की खपत बढ़ी
राज्य में पिछले पांच साल के दौरान 6420.43 मिलियन यूनिट बिजली की खपत बढ़ गई है. वहीं उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 4141831 हो गई है.
साल-दर-साल बढ़ी बिजली खरीद की लागत
वर्ष सालाना कितने करोड़ की बिजली
2013-14 3014.08 करोड़
2014-15 4775.62 करोड़
2015-16 5336.79 करोड़
2016-17 5403.40 करोड़
2017-18 5733.36 करोड़
2018-19 5740 करोड़
2019-20 6548 करोड़
2020-2021- 7000 करोड़
किस कंपनी से सालाना कितने करोड़ की बिजली खरीदी जाती है
फरक्का- 265.32 करोड़, फरक्का टू- 50.69 करोड़, कहलगांव वन 66.39 करोड़, तालचेर: 113.41, कहलगांव टू: 64.23 करोड़, बाढ़: 62.28 करोड़, दारी पिल्लई: 191.15 करोड़, नवीनगर: 95.84 करोड़, नॉर्थ कर्णपुरा: 665.68 करोड़, कांटी: 19.44 करोड़ (एनटीपीसी के इन प्लांटों से सालाना 1594.43 करोड़ की बिजली खरीदी जाती है. एनएचपीसी(पन बिजली) के रंगीत से 15.21 करोड़, तिस्ता से 85.89 करोड़ की सालाना बिजली खरीदी जाती है. चुक्का से 40.04 करोड़, पुनसांगयू(भूटान) से 186.02 करोड़, डीवीसी: 2035.46 करोड़, पतरातू( प्रस्तावित): 212.20 करोड़, फेज वन से 465.12 करोड़, सिकिदिरी: 34.37 करोड़, टीवीएनएल: 836.64 करोड़, इंलैंड पावर: 161. 18 करोड़, आधुनिक: 356.17 करोड़, सोलर पानर: 705.30 करोड़, पीजीसीआइएल: 124.96 करोड़, पोस्को: 1.55 करोड़, एपीएनआरएल: 132.11 करोड़ और पीटीसी से 579.47 करोड़ की बिजली सालाना खरीदी जाती है.

