धनबाद,गोड्डा और चतरा में उम्मीदारों के चयन से स्थानीय कांग्रेसी नेताओं में नाराजगी ..
रांची: झारखंड में लोकसभा चुनाव से पहले इंडी गठबंधन में भीतरघात होने की संभावना तेज हो गई है। इसका लाभ भाजपा को सीधा होता दिख रहा है। कांग्रेस में एक तो उम्मीदरों के नाम की घोषणा देरी से करने और स्थानीय और मजबूत जनाधार वाले व्यक्ति को टिकट नहीं देने से संबंधित कार्यकर्ताओं में नाराजगी उत्पन्न हो गई है। चुनाव में कार्यकर्ता अलग रुख अपना सकते हैं।
धनबाद लोकसभा सीट की बात करे तो यहां पर कांग्रेस पार्टी में कई कद्दावर नेता चुनाव में टिकट लेने के लिए कतार में थे।लेकिन पार्टी ने बेरमो विधायक अनूप सिंह की पत्नी अनुपमा सिंह को टिकट दे दिया। इससे वहां के स्थानीय कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। इससे भाजपा प्रत्याशी ढुल्लू महतो की राह आसान हो गई। वहीं गोड्डा लोकसभा सीट की बात करे तो पहले नंबर पर पार्टी को किसी अल्पसंख्यक नेता को टिकट देना चाहिए या कोई यादव समाज के व्यक्ति टिकट देना चाहिए। गोड्डा में मुस्लिम और यादव वोटरों की संख्या अच्छी खासी है,जो किसी भी प्रत्याशी की जीत और हार तय करती है। यहां पर भी पार्टी ने दीपिका सिंह पाण्डेय को टिकट देकर भाजपा की राह आसान करने का काम किया है।
अब चतरा की बात किया जाय तो यहां पर स्थानीय नेता देने की डिमांड पिछले लोकसभा चुनाव में भी हुआ था। यही कारण है कि भाजपा ने इसबर स्थानीय नेता को ही प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर पार्टी को आबादी के हिसाब से किसी यादव समाज के नेता को टिकट देना चाहिए या कोई स्थानीय व्यक्ति को,लेकिन पार्टी ने यहां पर केएन त्रिपाठी को टिकट दिया है। केएन त्रिपाठी चतरा के नहीं है। इस सीट पर भी कांग्रेस ने भाजपा को जीत का मौका देने का काम किया है।
वहीं राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस बार झारखंड में भाजपा कई सीट लूज कर सकती थी। इसमें इंडिया गठबंधन को इसका लाभ होने की पूरी संभावना थी। लेकिन पार्टी ने यह मौका गवा दिया है। लोकसभा चुनाव में इंडी गठबंधन एनडीए से नहीं अपनी ही पार्टी से नाराज पार्टी कार्यकर्ताओं से दो चार होना पड़ेगा। इसका प्रभाव निश्चित रूप से चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।

