खूंटी में अर्जुन मुंडा और कालीचरण मुंडा के बीच सीधा मुकाबला,तीसरी अदृश्य शक्ति भी रेस में…
खूंटी: जनजातीय क्षेत्र खूंटी लोकसभा सीट इस बार भी सबसे अहम है और इसके चुनाव परिणाम पर पुरे देश की निगाह है। यहां पर 13मई को मतदान होने वाला है। इस सीट पर अबतक किसी भी प्रत्याशी ने नामांकन पर्चा दाखिल नहीं किया है। हालांकि चुनाव प्रचार अभियान एनडीए और महागठबंधन, दोनों के प्रत्याशी लगातार दौरा कर जनता को अपने पक्ष में करने में लगे हुए हैं। एनडीए से केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा मैदान में हैं और महागठबंधन से कांग्रेस नेता कालीचरण मुंडा हैं। यानी दो मुंडा की सीधी लड़ाई इस बार भी यहां पर होने वाली है। इस बीच तीसरी अदृश्य शक्ति भी मैदान में इस बार मजबूती के साथ उतरने वाली है। यह शक्ति कांग्रेस और भाजपा दोनों के वोटों पर सेंधमारी कर सकती है,या कहीं ऐसा भी हो सकता है कि दो की लड़ाई में तीसरे खिलाड़ी के भाग्य न खुल जाए। खूंटी में इस बार कुछ भी संभव है।
खूंटी लोकसभा क्षेत्र में बेरोजगारी,बाईपास,मूलभूत समस्या सहित कई मुद्दे पर भाजपा घिरती हुई नजर आ रही है। इस मुद्दे को कांग्रेस प्रत्याशी कालीचरण मुंडा पिछले पांच सालों से जनता के बीच होमवर्क करवा रहे हैं। कोई भी कंपीटिशन होने से पहले जैसे विद्यार्थियों को सिलेबास रटा दिया जाता है,ठीक उसी तरह से कांग्रेस प्रत्याशी कालीचरण मुंडा ने खूंटी की जनता को भाजपा के खिलाफ मुद्दे को रटा दिया है। फाइनल परीक्षा के लिए चुनाव प्रचार के दौरान लोगों को रिवाइज करवाया जा रहा है। इस हिसाब से तो अबतक कालीचरण मुंडा की स्थिति मजबूत दिख रही है।
वहीं भाजपा प्रत्याशी अर्जुन मुंडा पीएम मोदी के विकास रथ पर सवार होकर चुनावी जंग जीतना चाहते हैं। चुनाव प्रचार में राष्ट्रीय मुद्दा को अधिक से अधिक बखान कर जनता को अपने पक्ष में करने में लगे हुए हैं। इसमें प्रमुख रूप से भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलीहातु का सुंदरीकरण,जनजातीय गौरव दिवस,कृषकों को केंद्र सरकार के द्वार दी जाने वाली सहायता राशि व अन्य लाभ का बखान कर रहे हैं। यही नहीं लोकसभा क्षेत्रों में एकलव्य विद्यालय की स्थापना,हाल ही में बाईपास निर्माण के लिए शिलान्यास सहित कई केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही विकास योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं। लेकिन जंगल और गांव में रहने वाले गरीब आदिवासियों को इससे बहुत अंतर नहीं दिख रहा है।
वहीं तीसरी अदृश्य शक्तियों के बारे में भी आपको जानना चाहिए। यह शक्ति पत्थलगढ़ी समर्थक नेता है। जो भाजपा सरकार का विरोधी माना जाता है। पूर्व की रघुवर सरकार के कार्यकाल में खूंटी में पत्थलगढ़ी की घटना चरम पर थी। राज्य और केंद्र सरकार के विरोध में नारेबाजी होती थी और गांव के मुहाने पर जिला प्रशासन और नेताओं को रोकने के लिए बड़े आकार का शिला को लगा दिया जाता था,जिसे पत्थलगड़ी कहा जाता है। इसमें भारत का संविधान वे लोग अपने हिसाब से लिखते थे। यही नहीं बैंक और ग्राम सभा की स्थापना की गई थी। इन लोगों ने कई गांव के हजारों ग्रामीणों का आधार कार्ड सामूहिक रूप से जलवा दिया था। सरकार की कोई भी योजना लेने से मना कर दिया गया था। इस बार के लोकसभा चुनाव में यही अदृश्य शक्ति मैदान में उतरने वाली है,इसमें बबीता कच्छप का नाम सामने आ रहा है।
खूंटी लोकसभा सीट पर प्रत्याशियों के नामांकन करने बाद स्थिति और भी साफ हो जाएगी।

