श्री दिगंबर जैन समाज का दसलक्षण महापर्व विधि सम्मत हुआ आरंभ
रामगढ़ – शहर के मेन रोड में स्थित श्री महावीर जिनालय एवं रांची रोड स्थित श्री पारसनाथ जिनालय मे दसलक्षण पर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म का पूजा पुरे विधि विधान के साथ किया गया।आज दोनों मंदिरो मे दसलक्षण पर्व विधान का मांडला मांडा गया। मुख्य कलस एवेम 4अन्य कलस स्तापित किया गया।मांडला जी मे अष्ट धातु के आठ स्थापित किया गया।प्रथम अभिषेक रामगढ़ श्रीमती अमराओ देवी पाटनी, मानिक जैन पाटनी, प्रदीप पाटनी,महेंद्र बागरा,रांची रोड बिमल सेठी, शांतिधारा रामगढ़ विद्याप्रकाश पदम चंद छाबड़ा,रांची रोड नरेन्द छाबड़ा ने किया।मुख्य मंगल कलश स्थापना रामगढ़ श्रीमती अनीता चूड़ीवाल रांची रोड सुभाष जैन ,वैभव पाटनी ने किया।
अन्य कलश सरला सेठी, प्रिया पाटनी, सुनीता चूड़ीवाल, मनीषा पाटनी, नरेंद्र छाबड़ा, बिनोद सेठी, प्रमोद सेठी, नितेश सेठी ने किया।अस्ट धातु उषा पाटनी, शारदा अजमेरा, बबिता काला, किरण सेठी, चंदा रापड़िया, प्रतिभा सेठी, स्वेता काला, ममता गंगवाल ने किया। दीप प्रज्वलन श्रीमती उषा अजमेरा ने किया |
संसार में प्रत्येक मानव प्राणी के लिए क्षमा रूपी शास्त्र इतना आवश्यक है कि जिनके पास यह क्षमा नहीं होती वह मनुष्य संसार में अपने इष्ट कार्य की सिद्धि नहीं कर सकता है।
क्षमा यह आत्मा का धर्म है, इसलिए जो मानव अपना कल्याण चाहते हैं, उन्हें हमेशा इस भावना की रक्षा करनी चाहिए। क्षमावान् मनुष्य का इस लोक और परलोक में कोई शत्रु नहीं होता है। क्षमा ही सर्व धर्म का सार है। क्षमा ही सम्यग्दर्शन, ज्ञान, चारित्र रूप आत्मा का मुख्य सच्चा भंडार है। जैसे कि
उत्तम क्षमा गुण गण सहयारी।
उत्तम खम मुनि विंद पयारी।।
उत्तम खम बहुयन चिन्तामणि।
उत्तम खम सपं जह मणि।।
उत्तम क्षमा गुणों के समूह के साथ रहना |

