बिजली वितरण निमग का हालः एक ईडी, 15 चीफ इंजीनियर, 25 एसइ, 60 एक्सक्यूटिव इंजीनियर, 125 एई और 250 जेई, हर महीने वेतन पर 4.62 करोड़ खर्च, फिर भी लोड शेडिंग
वितरण निगम पर कर्जदार हावी, कहा, पैसा दो तब देंगे बिजली
कर्ज में डूबा बिजली बोर्ड, सैलरी और पेंशन देने पर भी आफत
झारखंड में 410 मेगावाट बिजली की कमी, 50 लाख उपभोक्ता कर रहे त्राहिमाम
रांचीः झारखंड की पावर सप्लाई सिस्टम अनकंट्रोल हो गया है। राज्य के लगभग 50 लाख उपभोक्ता इस भीषण गर्मी में त्राहिमाम -त्राहिमाम कर रहे हैं। हर जिले में चार से पांच घंटे तक बिजली की कटौती की जा रही है। इसकी वजह यह है कि झारखंड को विभिन्न स्त्रोतों से बिजली नहीं मिल पा रही है। राज्य सरकार के एक मात्र उपक्रम टीवीएनएल की एक यूनिट बंद है। इस कारण 160 मेगावाट बिजली नहीं मिल पा रही है। एनटीपीसी से 150 मेगावाट और ताला से 100 मेगावाट बिजली नहीं मिल पा रही है। पूरे राज्य में आज की तारीख में लगभग 2400 मेगावाट बिजली की डिमांड है। जिसमें 410 मेगावाट बिजली की कमी है। ऐसा इसलिए भी है कि राज्य गठन के 22 साल बाद भी झारखंड एक मेगावाट बिजली का उत्पादन नहीं बढ़ पाया है।
अफसर बढ़ गए, उत्पादन और संसाधन घट गया
झारखंड में भले ही 22 साल बाद भी एक मेगावाट उत्पादन और संसाधन नहीं बढ़ा , लेकिन अफसर बढ़ते चले गए। वर्तमान में झारखंड में बिजली व्यवस्था को देखन के लिए एक एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, 15 चीफ इंजीनियर, 25 सुपरीटेंडिंग इंजिनियर, 60 एक्सक्यूटिव इंजीनियर, 125 असिस्टेंट इंजीनियर और 250 जूनियर इंजीनियर हैं। इनके खाते में हर माह वेतन के रूप में चार करोड़ 62 लाख 50 हजार रुपए जाता है। इसके बावजूद बिजली सप्लाई की स्थिति डांवा डोल है। पत्ता भी खड़कता है तो बिजली रफुचक्कर हो जाती है। लोकल फॉल्ट खोजने में घंटों लग जाते हैं।
किसकी कितनी है सैलरी
एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर- प्रति माह 2.50 लाख रुपए
चीफ इंजीनियर- प्रतिमाह दो लाख रुपए
सुपरीटेंड़िग इंजीनियरः प्रतिमाह दो लाख रुपए
एक्जीक्यूटिव इंजीनियरः प्रतिमाह 1.5 लाख रुपए
असिस्टेंट इंजीनियर- प्रतिमाह एक लाख रुपए
जूनियर इंजीनियर- प्रतिमाह 70 हजार रुपए
कर्ज में डूब गया है वितरण निगम
झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम पूरी तरह से कर्ज में डूब गया है। इसका कर्ज बढ़कर 8000 करोड़ रुपए से अधिक का हो गया है। टीवीएनएल का 3500 करोड़, डीवीसी का 3500 करोड़, एनटीपीसी का 200 करोड़ रुपए कर्ज है। इसके अलावा अन्य स्त्रोतों से बिजली लेने के एवज में भी करोड़ों रूपए बकाया है। हाल यह है कि बिजली वितरण को सैलरी और पेंशन देने पर भी आफत हो गया है।

