डर और मनोरंजन के साथ बच्चे खेल रहे हैं ,लंगूर के साथ

पदमा । इन दिनों पदमा प्रखंड में बच्चों और बड़ो दोनों का मनोरंजन का साधन एक लंगूर बन चुका है ।

यह लंगूर बीते दो तीन सालो से पदमा प्रखंड को ही अपना घर बना रखा है, जब भूख लगता तो गांव चला आता और जब पेट भरता तो जंगलों में लौट आता ,

बता दें की पदमा प्रखंड चारों ओर से घनी जंगलों और पहाड़ों से घिरा हुआ है , इसलिए यह लंगूर हमेशा प्रखंड में ही देखने को मिलता है। इसका रहने और जाने का सिलसिला बीते सालों से चलता आ रहा है।

बताया जाता है की ये लंगूर पदमा प्रखंड के अलग-अलग जगहों में अपना घर बना रखा है और इन्ही जगहों से अपना पेट पाल रहा है।

फिलहाल अभी तक इसने पदमा में कोई क्षति तो नहीं पहुचाई , लेकिन इससे उम्मीद भी नहीं लगाया जा सकता है , कि यह क्षति नहीं पहुंचाएगा। इसका कारण यह की इसी के प्रजाति ने पिछले साल कई लोगों को घायल कर चुका है ।

वहीं कुछ लोग इसे भगाते दिखे , तो कहीं कुछ लोग इसे खाने को देते दिखे ,जब से यह लंगूर को यहां देखा गया है , तब से इसके प्रति प्यार और डर दोनों लोगों में बना हुआ है ।

बच्चे तो इसे मनोरंजन का एक साधन बना चुके हैं , बंदर जहां जहां जाता बच्चे उसके पीछे पीछे दौड़ लगाते हैं और जब लंगूर बच्चों को दौड़ाता बच्चे जगह ढूंढ छिप जाते। ऐसी ही सिलसिला फिलहाल बना हुआ है।

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