श्रीमद् देवी भागवत कथामृत के श्रवण मात्र से प्राणियों का जीवन सार्थक और सुखमय होगा: स्वामी चिदात्मन जी महाराज
पटना। नौ दिवसीय अनंत श्री लक्षाहुति अम्बा महायज्ञ सह श्री मद् भागवत कथा को संबोधित करते हुए परम पूज्य गुरुदेव संत शिरोमणि करपात्री अग्निहोत्री परमहंस स्वामी चिदात्मन जी महाराज ने कहा कि भागवत कथा अमृत के श्रवण मात्र से प्राणियों का जीवन सार्थक व सुखमय होगा। कथा वाचन श्री साई बाबा सेवा समिति, पुलिस कालनी, पटना में संचालित है। जिसे संबंधित करते हुए महाराज जी ने कहा कि ज्ञान मंच पर सर्वप्रथम दीप प्रज्ज्वलित का अभिप्राय अपने अंदर स्थित दिव्य ज्ञान को जागृत करना है। उनहोंने इसकी महत्ता को बताते हुए कहा कि चला चले च संसारे धर्म एको हि निश्चल : अर्थात यह संसार चलाचल है। केवल सनातन धर्म ही शाश्वत है। ऋग्वेद का प्रथम अन्वेषण अग्नि है। यज्ञ के पांच अंग है! जिसमें तीन क्रिया जयात्मक, पठात्मक एवं हवनात्मक है। यज्ञ मण्डप पर दो क्रिया ज्ञान मंत्र भण्डारा के रूप में सम्पादित होता है। उन्होंने राजा दशरथ को व्याख्या करते हुए कहा कि जो पंच येन्द्रिय और ज्ञानेन्द्रियों को वश में करता है। यज्ञ भी तीन प्रकार के सात्विक, राजश्री एवं तामसी होता है । यह यज्ञ पूर्णतया सात्विक है जिसमें पत्ता पत्ता पर अश्वमेध यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है। इससे इहलौकिक और परलौकिक गति भी प्राप्त होती है।
नव दिवसीय कथा यज्ञ तीन देवियों का प्रतीक है!महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का वर्णन आता है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति धर्म की रक्षा करने वाली है। धर्म हमारे माँ बहन के समान है। अतीत, गौरव और मर्यादा को बनाये रखना ही धर्म है। श्री राम चरित मानस वर्णित विजय रथ, शौर्य, धैर्य और विनम्रता मानव धर्म है। सोनपुर मेला को अज्ञानतावश पशुत्व की संज्ञा दी गई है। श्री मद् भागवत व्यासपीठ के पं. श्री लक्ष्मण भारद्वाज, यज्ञ आचार्य पंडित रंजन शास्त्री, आचार्य पंडित दिनेश झा, पंडित सदानन्द झा, पंडित राम झा, पंडित सुजीत पाठक व पंडित रविनन्दन झा भी शामिल हैं।

