फूलो-झानो आशीर्वाद योजना से जुड़कर हड़िया-दारु की बिक्री छोड़ बहालेन ने बनाई अपनी पहचान
खूंटी: फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से जुड़कर सैकड़ों ग्रामीण आदिवासी महिलाएं हड़िया,शराब की बिक्री छोड़ चुकी हैं। इसी कड़ी मेंबहालेन कोनगाड़ी पिछले करीब 7 सालों से बाज़ार में हडिया बेचकर अपना परिवार चला रही थी। फूलो झानो आशीर्वाद योजना के संबंध में समूह एवं ग्राम संगठन के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली। उसने जागरूक होकर हडिया बिक्री छोड़कर फूलो झानो आशीर्वाद योजना से जुड़ी। ग्राम संगठन के माध्यम से दीदी को 10,000 रु. की सहयोग राशि उपलब्ध कराई गई। जिससे दीदी कोई भी सम्मान जनक आजीविका को अपनाकर अपना परिवार चला सके । जब दीदी को 10,000 रु. की सहायता मिली उन्होंने अपने हडिया बेचने का काम छोड़कर अपने ही घर में एक छोटा किराना दुकान संचालित करने लगी हैं। और अब दीदी के गाँव टोला के लोग अपनी आवश्यक सामान दीदी के दुकान से ही खरीदते हैं। साथ ही साथ दीदी गाँव के बाज़ार में मिठाई बनाकर बेचती है। अब दीदी हडिया बेचने का व्यवसाय को पूरी तरह छोड़ चुकी है, अपने नये व्यवसाय में जुड़ गई । दीदी को मनरेगा योजना के तहत 1 एकड़ में आम बागवानी और सिचाई के लिए कुआँ भी मिला है ।
हड़िया-दारू बेचने के कार्य से जुड़ी महिलाओं के जीवन में फूलो-झानो आशीर्वाद योजना आशा की नई किरण लेकर आयी है। इस योजना के तहत सम्मानजनक आजीविका से जुड़ने के लिए 10 हजार रूपए का लोन देने का प्रावधान है। बहालेन कोंगाड़ी कहती हैं कि अपना परिवार चलाने के लिए वो हड़िया/दारू बेचती थी, क्योंकि परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उन्हें फूलो झानो आशीर्वाद योजना के तहत उन्हें बिना ब्याज का 10 हजार रूपए का लोन उपलब्ध कराया गया। उन्होंने कहा कि इससे अब वो अपनी दुकान का संचालन कर रहे हैं। अब उन्हें सम्मान और समाज में नई पहचान भी मिलीं है।
ग्रामीण क्षेत्रों में मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से झारखंड सरकार ने इस योजना को शुरू किया है। साथ ही यह योजना मादक पदार्थ बेचने वाली महिलाओं के जीवन को भी सुधारने और उन्हें नई आजीविका प्रदान करने में भी मदद करेगी। इसके साथी ही महिलाओं को झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के तहत चल रहे आजीविका संवर्धन के अलग-अलग कार्यक्रमों से भी जोड़ा जा रहा है।
■ फुलो झानो आर्शीवाद योजना का लाभ
1.फूलो झानो आशीर्वाद योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है।
2.महिलाओं को नया व्यापार शुरू करने के लिए दस हजार का ऋण दिया जाता है।
3.मादक पदार्थ हड़िया, दारु आदि बेचने वाली महिलाओं को ही योजना का लाभ दिया जाएगा।
4.योजना की मदद से ग्रामीण महिलाएं अपने व्यापार को बदल कर नए रोजगार की शुरुआत कर पाएंगी।
5.नया व्यापार शुरुकर ग्रामीण महिलाएं सम्मानजनक आजीविका के साथ अपना जीवन यापन कर पाएंगी।
6.आजीविका मिशन के तहत चुनिंदा महिलाओं को सक्रिय कैडर के रूप में भी चुना जाएगा, वे अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत की तरह कार्य करेंगी।

