मांडर उपचुनाव में दांव पर होगी बीजेपी और महागठबंधन की प्रतिष्ठा
रांचीः मांडर उपचुनाव में बीजेपी और महागठबंधन में शामिल दल खासकर कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा दांव पर होगी। पूर्व विधायक बंधु तिर्की की सदस्यता रद्द होने के बाद यह सीट खाली हो गई थी। कांग्रेस ने इस बार उपचुनाव में बंधु तिर्की की बेटी शिल्पी नेहा तिर्की को मैदान में उतारा है। वहीं बीजेपी ने फिलहाल अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। खास कर बीजेपी के लिए यह चुनाव काफी अहम होगा। क्योंकि पिछले तीन उपचुनाव में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। दुमका, बेरमो और मधुपूर विधानसभा उपचुनाव में महागठबंधन को ही जीत मिली है। दुमका विधानसभा सीट सीएम हेमंत सोरेन के छोड़ने से खाली हुई थीl जबकि बेरमो एवं मधुपुर सीट पर उपचुनाव चुनाव राजेंद्र प्रसाद सिंह और हाजी हुसैन अंसारी के निधन के कारण हुएl दुमका सीट पर झामुमो से बसंत सोरेन ने जीत हासिल की थी। बेरमो से राजेन्द्र प्रसाद सिंह के बेटे और कांग्रेस प्रत्याशी कुमार जयमंगल जीतेl जबकि मधुपूर से झामुमो प्रत्याशी और पूर्व मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के बेटे हफीजुल अंसारी उपचुनाव जीते थेl 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में बंधु तिर्की ने बीजेपी के उम्मीदवार देव कुमार धान को 23127 वोटों के अंतर से पटखनी दी थी। तीसरे स्थान पर एआईएमआईएम के शिशिर लकड़ा रहेl आजसू की हेमलता उरांव चौथी स्थान पर और कांग्रेस के सन्नी टोप्पो पांचवें स्थान पर थेl हालांकि बंधु तिर्की इस सीट से तीन बात जीत हासिल की है।
हमेशा पाला बदलते रहे हैं पूर्व विधायक बंधु तिर्की
झारखंड के पूर्व विधायक बंधु तिर्की ने सबसे अधिक पाला बदला। अपने राजनीति करियर में हर बार अलग अलग सिंबल से चुनाव लड़ा। बताते चलें कि बंधु तिर्की अब तक पांच विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। हर बार अलग-अलग दलों से। राज्य के गठन से पहले बंधु तिर्की पहली बार राजद के टिकट पर चुनाव लड़े। इसमें उन्होंने जीत भी हासिल की। फिर राज्य गठन के बाद 2005 में मांडर से यूजीडीपी की टिकट पर बंधु तिर्की चुनाव लड़े और जीत हासिल की। 2009 में झारखंड जनाधिकार मंच के बैनर तले चुनाव लड़े और जीत हासिल की। 2014 में फिर बंधु तिर्की ने पाला बदला और तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े । इस दफा वे हार गए। 2019 में फिर बंधु ने पाला बदला और झाविमो की टिकट पर चुनाव लड़े और जीते। इसके बाद फिर पाला बदलते हुए कांग्रेस में शामिल हो गए। अब उनकी बेटी कांग्रेस से उम्मीदवार हैं। बेटी जीत और हार को बंधु तिर्की के जीत और हार के तौर पर देखा जाएगा.

