उप प्रमुख अरुण साबू के प्रयास का असर: अब ग्रामीणों को भी 25 दिन में मिलेगी गैस”
खूंटी : ग्रामीण एवं शहरी LPG उपभोक्ताओं के बीच गैस डिलीवरी को लेकर लंबे समय से चले आ रहे 25 दिन और 45 दिन के अंतर को समाप्त करने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। अब ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी शहर के उपभोक्ताओं की तरह 25 दिनों के अंतराल में गैस उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की जा रही है।
मुरहू भारत गैस एजेंसी के संचालक सुरेश प्रसाद ने बताया कि मुरहू के उप प्रमुख अरुण कुमार साबू द्वारा ग्रामीण उपभोक्ताओं की समस्या को गंभीरता से उठाया गया था। इस संबंध में भेजे गए मेल तथा अखबार में प्रकाशित समाचार का असर हुआ है। पेट्रोलियम विभाग की ओर से सभी गैस एजेंसियों के लिए पत्र जारी कर ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी शहर के उपभोक्ताओं के आधार पर 25 दिनों में गैस उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
सुरेश प्रसाद ने बताया कि यह व्यवस्था 8 सितंबर 2026 से लागू की जानी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन और शहरी उपभोक्ताओं के लिए 45 दिन की अलग-अलग व्यवस्था को लेकर जो समस्या थी, अब उसके समाप्त होने से ग्रामीण जनता को बड़ी राहत मिलेगी।
उन्होंने उप प्रमुख अरुण कुमार साबू के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वे जनहित के कार्यों को काफी तत्परता से उठाते हैं। भारत गैस एजेंसी, मुरहू की ओर से उन्होंने ग्रामीण उपभोक्ताओं की समस्या को उठाने और उसके समाधान के लिए किए गए प्रयासों के लिए उप प्रमुख को धन्यवाद दिया।
वहीं उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने भारत सरकार एवं पेट्रोलियम विभाग को धन्यवाद देते हुए कहा कि जनता की समस्या पर जिस तेजी से कार्रवाई हुई है, वह स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह जनता की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई होती रहे तो आम लोगों में सरकार के प्रति विश्वास और खुशी दोनों बढ़ेंगे।
उन्होंने जिला प्रशासन एवं जिला अधिकारी को भी धन्यवाद दिया कि ग्रामीण जनता की गैस संबंधी गंभीर परेशानी को आगे बढ़ाने और समाधान की दिशा में सहयोग किया गया।
अरुण कुमार साबू ने कहा कि यह केवल मुरहू के ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए राहत नहीं है, बल्कि एक प्रखंड स्तर से उठाई गई जनसमस्या का समाधान पूरे देश के ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए भी हर्ष का विषय है।
उन्होंने कहा, “जनता की समस्या उठाना जनप्रतिनिधि का दायित्व है और जब उस समस्या का समाधान होता है तो इससे बड़ी खुशी जनप्रतिनिधि के लिए कुछ नहीं हो सकती।”


