रांची क्लब की जमीन पर मॉल निर्माण का विरोध, सीआईडी जांच और सरकारी हस्तक्षेप प्रेमशाही मुंडा ने की मांग
गणादेश,रांची: आदिवासी जन परिषद के वरीय नेता प्रेमशाही मुंडा ने रांची क्लब की 9.60 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित व्यावसायिक निर्माण का विरोध करते हुए इसे आदिवासी आस्था, संस्कृति और परंपरा पर हमला बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भूमि मंडा पूजा की जमीन है, जिसका हस्तांतरण नहीं किया जा सकता और इस पर किसी भी प्रकार का व्यावसायिक निर्माण नियमों के विरुद्ध है।
प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इस भूमि पर करीब एक हजार करोड़ रुपये की लागत से मॉल बनाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हस्तक्षेप करने और संबंधित जमीन को सरकार के नियंत्रण में लेने की अपील की है। साथ ही उन्होंने मामले की सीआईडी जांच कराने की भी मांग की।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में रांची नगर निगम के नगर आयुक्त, राज्य के मुख्य सचिव सहित कई अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। उनका कहना है कि रांची क्लब परिसर का उपयोग केवल क्लब और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए होना चाहिए, न कि व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए।
प्रेमशाही मुंडा ने यह भी आरोप लगाया कि 9.60 एकड़ ही नहीं, बल्कि कुल 10.467 एकड़ भूमि भी जीएल चर्च के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की सहमति या मंजूरी के बिना कथित रूप से अवैध तरीके से रांची क्लब लिमिटेड को लीज पर दी गई थी। उन्होंने कहा कि लीज की शर्तों के अनुसार इस भूमि का उपयोग केवल सामाजिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों के लिए होना था, लेकिन अब इसका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आदिवासी जन परिषद आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। उनका कहना है कि आदिवासी समाज अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।


