गंगा के कटाव पर CM सम्राट का बड़ा एक्शन प्लान: 12 किमी तटबंध होगा मजबूत, ड्रेजिंग से थमेगी नदी की मार
@ राघोपुर-महादेवपुर में एरियल सर्वे के बाद सीएम सम्राट चौधरी ने कटाव स्थल का लिया जायजा, संवेदनशील इलाकों में तेजी से बचाव कार्य के निर्देश।पुरानी रेल लाइन तटबंध को सुरक्षित रखने के लिए किए जा रहे कार्यों का भी निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को निर्देश दिया कि तटबंध की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा की तेज धारा और लगातार हो रहे भीषण कटाव के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार को भागलपुर पहुंचे। उन्होंने नवगछिया अनुमंडल के राघोपुर और महादेवपुर इलाके का दौरा कर बाढ़ और कटाव की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने पहले हेलीकॉप्टर से भागलपुर और नवगछिया के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का एरियल सर्वे किया। इसके बाद राघोपुर-महादेवपुर पहुंचकर कटाव प्रभावित स्थलों का स्थल निरीक्षण किया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से तटबंध की मौजूदा स्थिति, नदी के जलस्तर, धारा के दबाव और अब तक चलाए गए बचाव कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने साफ निर्देश दिया कि संवेदनशील स्थानों पर बचाव कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त संसाधन लगाकर काम की रफ्तार बढ़ाने को कहा गया।
मुख्यमंत्री विक्रमशिला पुल से उतरने के बाद जहान्वी चौक से पहले महादेवपुर रेल घाट पहुंचे। यहां उन्होंने तटबंध और गंगा की धारा की स्थिति को करीब से देखा। इसके बाद वे राघोपुर जमींदारी तटबंध के कटाव स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि गंगा की तेज धारा के कारण कई स्थानों पर तटबंध पर लगातार दबाव बना हुआ है। कटावरोधी कार्य के तहत संवेदनशील स्थानों पर बोरे, जियो बैग और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पुरानी रेल लाइन तटबंध को सुरक्षित रखने के लिए किए जा रहे कार्यों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तटबंध की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। जहां कटाव का खतरा अधिक है, वहां पहले से संसाधन उपलब्ध कराकर तत्काल बचाव कार्य कराया जाए।
निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गंगा सहित क्षेत्र की प्रमुख नदियों की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि कटाव की समस्या का केवल तत्काल उपाय करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके स्थायी समाधान की दिशा में भी काम किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार करीब 10 से 12 किलोमीटर क्षेत्र में तटबंध को मजबूत करने की योजना है। इसके साथ ही गंगा नदी में ड्रेजिंग कराए जाने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य नदी की धारा को नियंत्रित करना और तटबंध पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव को कम करना है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि कटाव से प्रभावित पूरे इलाके को ध्यान में रखकर नदी की धारा और तटबंध की स्थिति को वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित करने की कोशिश की जाएगी।
पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सोन नदी से करीब 6.30 लाख क्यूसेक पानी आया है। इसके अलावा कोसी, गंडक और गंगा में भी पानी का दबाव बना हुआ है। सरकार इन नदियों की स्थिति को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि इन नदियों के तटबंधों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और स्थिति के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि करीब 20 से 26 किलोमीटर तक बैकवर्ड की स्थिति बनती है। इसे नियंत्रित करने के लिए लगभग 10 से 12 किलोमीटर क्षेत्र में स्टेज फिक्स करने की योजना है। बीच के हिस्से में ड्रेजिंग की व्यवस्था की जाएगी। इससे नदी की धारा को नियंत्रित करने और तटबंध पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अब तक किए गए बचाव कार्यों और आगे की कार्ययोजना की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जहां स्थिति ज्यादा गंभीर है, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम पूरा किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कटावरोधी कार्य की गति किसी भी स्थिति में धीमी नहीं पड़नी चाहिए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन और मशीनरी उपलब्ध कराई जाए। सरकार की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और तटबंध को सुरक्षित रखना है। मुख्यमंत्री ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्यों के साथ भविष्य में कटाव की समस्या को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान सांसद अजय कुमार मंडल, ऊर्जा मंत्री शैलेष कुमार उर्फ बुलो मंडल, पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेन्द्र, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह समेत जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।



