प्रसिद्ध मूर्तिकार फिल्म निर्माता तपन कुमार घोष मिनी क्लब से शुरू की थी दुर्गा पूजा
खूंटी। दुर्गा पूजा का भक्तिमय वातावरण में पूरा जिला भक्तिमय बना हुआ है।
1975 में खूंटी के ऐतिहासिक भगत सिंह चौक पर* तपन कुमार घोष ने मिनी क्लब की स्थापना की थी। उसी वर्ष उन्होंने अपने ही हाथों से माँ दुर्गा की प्रतिमा का निर्माण कर, मिनी क्लब के बैनर तले दुर्गा पूजा का शुभारंभ किया था।उस दौर में आज जैसी सुविधा नहीं थी, फिर भी तपन घोष द्वारा बनाई गई माँ दुर्गा की सुंदर और आकर्षक मूर्ति ने पूरे शहर का ध्यान खींचा।
तपन घोष केवल दुर्गा पूजा तक ही सीमित नहीं रहे। दुर्गा पूजा के बाद उन्होंने माँ काली पूजा और फिर माँ सरस्वती पूजा भी शुरू की। इस तरह वे वर्ष में तीन बार अपने हाथों से प्रतिमा का निर्माण कर पूजा करते रहे। लगातार कई वर्षों तक यह परंपरा उन्होंने निभाई।
उनके हाथों से बनी सुंदर, सजीव और आकर्षक मूर्तियों के कारण तपन घोष खूंटी जिला ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड प्रदेश में विख्यात हो गए।
मूर्ति कला के बाद तपन घोष ने अपनी कला को अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार दिया। चित्रकला, गीत-गजल, फिल्म कहानी लेखन और साहित्य में भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने ही झारखंड की पहली हिंदी फिल्म ‘कसम तिरंगा की’ का निर्माण किया था। इस फिल्म के लिए उन्हें झारखंड सरकार द्वारा बेस्ट फिल्म निर्माता और बेस्ट डायरेक्टर के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
मूर्ति कला, चित्रकला, फिल्म निर्माण और साहित्य के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के कारण उन्हें राज्य सरकार के अलावा देश के विभिन्न राज्यों और संस्थाओं से भी अनेकों सम्मान मिल चुके हैं।तपन घोष की मूर्ति कला और उनके द्वारा स्थापित मिनी क्लब का 52 वर्ष पुरा हो चुका है मिनी क्लब से ही भव्य क्लब काली पूजा समिति बनी जहाँ आज भी प्रति वर्ष माँ का ली की पूजा होती हैं।


