थाने में ही महिला की इज्जत सुरक्षित नहीं, रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा : सीमा सिंह

रांची : झारखंड प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष सीमा सिंह ने सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाने में एक पीड़ित महिला के साथ पुलिसकर्मी द्वारा कथित दुष्कर्म की कोशिश की घटना पर गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि झारखंड के थाने में भी महिला की इज्जत सुरक्षित नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक महिला के साथ हुई ज्यादती का मामला नहीं है, बल्कि पुलिस व्यवस्था और राज्य में महिला सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पीड़िता अपने घर के पारिवारिक विवाद को लेकर न्याय की गुहार लगाने थाने पहुंची थी। भय के कारण वह रात में थाने में ही रुक गई। लेकिन जिस थाने में उसे सुरक्षा और न्याय मिलना चाहिए था, वहीं एक पुलिसकर्मी द्वारा उसकी अस्मिता के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की बात सामने आ रही है।
श्रीमती सिंह ने कहा कि जब महिलाएं पुलिस थाने के भीतर ही सुरक्षित नहीं हैं, तो वे घर, सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर अपनी सुरक्षा को लेकर किससे उम्मीद करें? आखिर एक पीड़ित महिला न्याय मांगने कहां जाए? रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो आम महिलाओं का कानून और व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रहेगा?
उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार के छह वर्ष से अधिक के कार्यकाल में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ दुष्कर्म की 10000 से अधिक घटनाएं हो चुकी है। यह आंकड़ा राज्य में महिला सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आए दिन महिलाओं और बच्चियों के साथ होने वाली आपराधिक घटनाएं चिंता का विषय हैं। गम्हरिया की घटना ने एक बार फिर राज्य की महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार के दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीमा सिंह ने कहा कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के बजाय सरकार की ओर से केवल बयानबाजी और कार्रवाई का भरोसा दिया जाता है। यदि पुलिस थाने के भीतर ही ऐसी घटना सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी से सरकार बच नहीं सकती। ऐसा लगता है कि सरकार के संरक्षण में राज्य में अपराध को अंजाम दिया जा रहा है।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि इस मामले में केवल औपचारिक जांच और खानापूर्ति न हो। आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा पीड़िता की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाए। जांच के नाम पर किसी को बचाने या मामले की लीपापोती करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
सीमा सिंह ने कहा कि सरकार अपना चेहरा बचाने की बजाय पूरे मामले का सच जनता के सामने रखे। यह सुनिश्चित करे कि पीड़िता को न्याय मिले और दोषी चाहे किसी भी पद पर हो, उसे कानून के अनुसार सख्त सजा मिले। झारखंड की महिलाएं सुरक्षा, सम्मान और न्याय चाहती हैं, केवल सरकारी आश्वासन नहीं।

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