अफीम की खेती से तौबा करने और वैकल्पिक खेती करने की ग्रामीणों ने कही बात
खूंटी में 25गांव के ग्रामीणों की सांसद और पुलिस अधिकारियों के साथ हुई बैठक
रांची: अफीम की खेती के लिए बदनाम खूंटी जिले के किसान अब अफीम की खेती से तौबा करने और वैकल्पिक खेती की ओर बढ़ने का फैसला लिया है। जिले के पुलिस अधिकारियों और स्थानीय सांसदों ने 25गांव के ग्राम प्रधान के साथ बैठक कर इसपर चर्चा की है। सभी ग्राम प्रधानों ने एक स्वर से अफीम की खेती से तौबा करने की बात कही है। साथ ही कहा कि खूंटी किले की बदनामी हो रही है,पुलिस भी युवाओं को तंग करती है। गांव के युवाओं को अफीम की खेती के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। ग्रामप्रधानों का कहना था कि नक्सलवाद, उग्रवाद, विवादित पत्थलगड़ी, लूट-खसोट और अफीम की खेती जैसी समस्याओं की जड़ बेरोजगारी और पेट की भूख है। यदि सरकार आदिवासियों को आजीविका का सहारा दे तो पूरा इलाका अपराधमुक्त और खुशहाल बन सकता है।ग्रामप्रधानों ने सांसद से कहा कि पुलिस द्वारा ग्रामप्रधानों को नोटिस भेजना बंद किया जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ग्रामीण अब अफीम की खेती नहीं होगी।
वहीं ग्रामीणों ने सांसद को बताया कि पहले प्रखंड कार्यालय की ओर से लाह की खेती को बढ़ावा देने के लिए सेमियालता के पौधे उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। कोचांग पंचायत से साढ़े छह एकड़ जमीन में सेमियालता की खेती के लिए आवेदन भी दिया गया था। एक एकड़ में करीब साढ़े चार हजार पौधे लगाए जा सकते हैं, लेकिन पौधे उपलब्ध नहीं कराए गए। नतीजतन खेत खाली पड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सेमियालता पर लाह की खेती अफीम का बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।
ग्रामीणों ने सांसद के समक्ष शिक्षा की बदहाल स्थिति पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि गांवों के स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। शिक्षक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते, जिससे शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है।
इस मौके पर ग्रामीण हरि सिंह सोय ने कहा कि पूर्व की सरकार ने आदिवासियों की सामूहिक भूमि को लैंड बैंक के तहत अपने अधीन कर लिया था। अब आबुआ सरकार को चाहिए कि वह इस लैंड बैंक को रद्द करे।
सांसद कालीचरण मुंडा ने अफीम से होने वाले नुकसान पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे आदिवासियों की संख्या तेजी से घट सकती है। उन्होंने जोर दिया कि इन समस्याओं का समाधान ग्रामसभा स्तर पर ही निकलना चाहिए।
सांसद ने ग्रामप्रधानों के साथ अलग बैठक भी की। इसमें तय हुआ कि जल्द ही कोचांग में एक विशाल सभा आयोजित की जाएगी, जिसमें झारखंड सरकार के मंत्रियों को आमंत्रित किया जाएगा और समस्याओं के समाधान की मांग की जाएगी।



