भाजपा टिकट बंटवारे में समर्पित कार्यकर्त्ताओं की उपेक्षा, शीर्ष नेतृत्व ध्यान दें : सूरज मंडल

अनेक सीटों पर विपक्षियों की चाल सफल, भाजपा के कमजोर प्रत्याशी बनेंगे हार का कारण
गणादेश ब्यूरो

गोड्डा । पूर्व सांसद, झारखण्ड स्वशासी परिषद (जैक) के पूर्व उपाध्यक्ष एवं झारखण्ड मज़दूर मोर्चा के अध्यश्र सूरज मंडल ने कहा है कि झारखण्ड के 66 सीटों पर भाजपा के टिकट बंटवारे में समर्पित कार्यकर्त्ताओं की व्यापक स्तर पर उपेक्षा हुई है जिसके कारण भाजपा के हज़ारों-लाखों समर्पित कार्यकर्त्ताओं, भाजपा की राष्ट्रवादी नीतियों के प्रति मजबूत समर्थन रखनेवाले लोगों और शुभचिंतकों के मन में व्यापक असंतोष है। मंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा से अपील की है कि वे प्रत्याशी चयन में हुई गंभीर गलतियों में सुधार के लिये अविलम्ब कदम उठायें।
मंडल ने कहा कि झारखण्ड की अनेक विधानसभा सीटों पर विपक्षियों की चाल सफल हो गई है क्योंकि वहाँ से भाजपा के वैसे कमजोर प्रत्याशी उतारे गये हैं जिनकी जीत का एकमात्र आधार मोदी मैजिक है। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन, झामुमो और कांग्रेस के खिलाफ व्यापक स्तर पर कायम एंटी इनकमबैंसी का फायदा उठाने में भाजपा के वैसे कमजोर प्रत्याशी ही हार का कारण बनेंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पोड़ेयाहाट में भाजपा द्वारा वैसे प्रत्याशी की घोषणा की गयी है जो काफी कमजोर है। इसके अलावा मधुपुर में वैसे व्यक्ति को भाजपा ने टिकट दिया है जो न तो भाजपा का कार्यकर्त्ता था ना ही क्षेत्र में रहता है बल्कि वह गोवा में जहाजों में लेबर सप्लाई का काम करता है। उन्होंने कहा कि अबकी चुनाव में भाजपा की हार की साज़िश रची गयी है जहाँ पत्थर, खान-खनिज, ज़मीन, कोयला और शराब माफियाओं के बीच टिकट बाँटा गया है जो न तो भाजपा के हित में है न ही झारखण्ड के हित में।
मंडल ने कहा कि लूईस मरांडी जैसी समर्पित पार्टी कार्यकर्त्ता की उपेक्षा के कारण ही वह पार्टी छोड़कर झामुमो में जाने को मजबूर हुई।
मंडल ने कहा कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका परिवारवाद के खिलाफ होना है लेकिन एक राज्यपाल की बहू, एक पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे, आजसू के एक सांसद के भाई जैसों को टिकट दिया गया और उससे भी बड़ी बात यह है कि वे सभी लोग भाजपा में कभी थे ही नहीं। उन्होंने कहा कि यह कदम पार्टी के वैचारिक आधार पर गहरा आघात है।
मंडल ने कहा कि बाबूलाल मरांडी और सीता सोरेन जैसे पार्टी के आदिवासी नेताओं को सामान्य सीट से टिकट देने की बजाय उन्हें रिज़र्व सीट से चुनाव लड़वाना चाहिये क्योंकि इसके कारण मूलवासियों एवं ओबीसी की हक़मारी हो रही है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनते ही मरांडी ने पहले ओबीसी आरक्षण की सीमा 27 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत कर दिया। उसके बाद 10 जिले के पंचायतों में 100 प्रतिशत आरक्षण कर दिया गया जो न केवल असंवैधानिक बल्कि ओबीसी समुदाय के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि मरांडी की नीति-रणनीति के कारण ही पिछले लोकसभा चुनाव में सभी पाँच आरक्षित सीट पर भाजपा की हार हुई। मंडल ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें दुमका लोकसभा सीट की जिम्मेदारी मिली थी और शिबू सोरेन जैसे प्रत्याशी को हार का मुँह देखना पड़ा था।
मंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपील की है कि टिकट बंटवारे में हुई विसंगतियों में अविलम्ब सुधार करना भाजपा की जीत के लिये बहुत आवश्यक है क्योंकि झारखण्ड की जनता कांग्रेस और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के भ्रष्टाचार से त्रस्त है जिससे उसे छुटकारा दिलाना बहुत जरूरी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *