झारखंड सरकार की स्वास्थ्य विभाग में भयानक वित्तीय कुप्रबंधन,कैग की रिर्पोट में खुलासा

रांची: झारखंड में स्वास्थ्य विभाग और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में भयानक वित्तीय कुप्रबंधन का कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है। कैग रिपोर्ट में झारखंड में चिकित्सा सुविधा, इंफा्रस्ट्रक्चर, दवाईयां, डॉक्टर, नर्सेज, पारा मेडिकल व अन्य कर्मचारियों की भारी कमी बताया गया है. ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2022 तक डॉक्टरों व बिशेषज्ञ डॉक्टरों के 6334 स्वीकृत पदों में से 2210 पद खाली रह गया है. जो कुल आवश्यकता का 61 प्रतिशत है. राज्य में दवाईंयों की खरीद व वितरण में भारी अनिमिततायें बरती गई है. ओपीडी व्यवस्था भी सुदृढ़ नहीं है. राष्ट्रीय आयुष मिशन व प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना भी फेल है. वहीं कोविड-19 के दौरान जहां जीवन रक्षक इंजेक्शन रेमेडिसविर की मारामारी व कालाबाजारी चल रही थी.
कैग द्वारा की गई जांच में पाया गया कि कोविड-19 के दौरान रेमेडिसविर इंजेक्शन के उपयोग करने में भारी अनिमिततायें बरती गई. रेमेडिाविर इंजेक्शन की 53205 शीशियां नामकूम स्थित केन्द्रीय गोदाम में पड़े-पड़े एक्सपायर्ड हो गई और राज्य गोदाम के भंडार में पड़ी हुई मिली. यही नहीं रेमेडिसविर इंजेक्शन की 6990 शीशियां कथित तौर पर एमडी एनएचएम और ड्रग कंट्रोलर झारखण्ड के टेलीफोनिक आदेश पर दो निजी आपूर्तिकर्ताओं मैसर्स मेडी सेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड रांची को 2040 शीशियां और मेसर्स हरिहर मेडिकल एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड रांची को 4950 शीशियां अनियमित तरीके से जारी किया गया. जिसकी उपयोगिता का कोई प्रमाण नहीं है.दिलचस्प बात यह है कि उनमें से मेसर्स हरिहर मेडिकल एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड ही रेमेडिसविर इंजेक्शन का राज्य सरकार का आपूर्तिकर्ता भी था. गुरूवार को विधानसभा में कैग रिपोर्ट पेश होने के बाद शुक्रवार को प्रधान महालेखाकार इंदु अग्रवाल ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उक्त जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि नामकुम रांची स्थित केन्द्रीय वेयर हाउस को जुलाई 2020 से जून 2021 तक रेमेडिसविर की कुल 1 लाख 64 हजार 761 शीशियाँ प्राप्त हुई थी. जिनमें से 1 लाख 11 हजार 556 शीशियां राज्य के सभी 24 जिलों के सीएस सह सीएमओ, रिम्स रांची, एमजीएम जमशेदपुर, सीसीएल अस्पताल कांके रोड, सैन्य अस्पताल नामकूम जेएमएचआईडीपीसीएल औषधि नियंत्रक आदि को जुलाई 2020 से फरवरी 2022 तक भेजी गई थी. शेष इंजेक्शन वेयर हाउस में अप्रयुक्त पड़ी रही।वहीं नमूने के तौर पर छह जिलों की जांच की गई, तो पता चला कि राज्य गोदाम से प्राप्त 15514 शीशियों में से केवल 6782 शीशियां ही स्वास्थ्य सुविधा केन्द्रों को वितरित की गई थी.
प्रधान महालेखाकार ने बताया कि कोविड-19 के दौरान राज्य में भारी कुप्रबंधन का आलम था. उन्होंने बताया कि राज्य में कोविड-19 के नियंत्रण के लिए कुल 756.42 करोड़ का प्रावधान किया गया था. झारखण्ड सरकार ने जेआरएचएमएस को केवल 436.97 करोड़ रूपये ही विमुक्त किया. जिसमें भारत सरकार का हिस्सा 291.87 करोड़ और राज्य का हिस्सा 145.10 करोड़ रूपये विमुक्त किया गया. झारखण्ड सरकार ने भारत सरकार की 191.67 करोड़ और राज्य का हिस्सा 127.78 करोड़ रूपये जारी ही नहीं किया. जेआरएचएमएस ने भी निर्गत 436.97 करोड़ के विरुध्द सिर्फ 137.65 करोड़ लगभग 32 प्रतिशत राशि का उपयोग किया. प्रधान महालेखाकार ने बताया कि कोविड-19 के दौरान वित्तीय प्रबंधन में कमी के कारण राज्य सरकार स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओ की स्थापना नही ंकर पायी. सरकार अस्पतालों में पर्याप्त बेड, जिला स्तर पर आरटीपीसीआर प्रयोगशालाएं, रांची में शिशु चिकित्सा उत्कृष्टता केंद्र,सीएचसी-पीएचसी-एचएससी में पूर्व निर्मित संरचनाएं और तरल चिकित्सा ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना नहीं कर पाई.

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