नेशनल ग्रिड में एक बार फिर ग्रिड डिसिप्लीन हुआ फेल, अधिक बिजली खींची, खड़ा हो गया बिजली संकट
रांची। झारखंड में एक बार फिर से बिजली संकट खड़ा हो गया है। नेशनल ग्रिड से बिजली लेने के एवज में एक बार फिर ग्रिड डिसिप्लीन फेल हो गया। इस कारण झारखंड में 600 मेगावाट बिजली की कमी हो गई। ग्रिड डिसिप्लीन फेल होने से बिजली बोर्ड के अफसरों के होश उड़ गए हैं। पीक आवर में नेशनल ग्रिड की फ्रिक्वेंसी 50 से घटकर 49.4 हर्टस हो गई। ऐसी स्थिति किसी प्रदेश द्वारा तय सीमा से अधिक बिजली लेने के कारण हुई। नेशनल ग्रिड पर संकट देखते हुए लोड डिस्पैच सेंटर ने राज्यों को तय कोटे से अधिक बिजली नहीं लेने का निर्देश दिया। ग्रिड डिसिप्लीन के अनुसार नेशनल ग्रिड की फ्रिक्वेंसी 50 हर्ट्स रहना अनिवार्य है। ऐसा रहने पर संतुलन बना रहता है। फ्रिक्वेंसी को 50 हर्ट्ज पर बनाए रखने के लिए नेशनल ग्रिड से जुड़े राज्यों का कोटा तय है। यदि कोई राज्य तय सीमा से अधिक बिजली ग्रिड से खींचता है तो इससे असंतुलन उत्पन्न होने लगता है। नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर पर इसकी निगरानी की जिम्मेदारी है।
कर्जा चुकाने के लिए लेगा 6000 करोड़ रुपए
झारखंड बिजली वितरण निगम कर्जा चुकाने के लिए केंद्र से छह हजार करोड़ का उधार लेगा। बताते चलें कि बिजली वितरण निगम पर डीवीसी, एनटीपीसी, पीटीसी समेत अन्य कंपनियों का बकाया है। यह उधार लेट पेमेंट सरचार्ज एंड रिलेटेड मैटर्स रूल्स के तहत लिया जाएगा। केंद्र सरकार ने सभी बिजली कंपनियों का बकाया चुकाने का निर्देश दिया है। बिजली वितरण निगम ने सरकार से अनुमति लेकर बैंकों से इस संबंध में प्रस्ताव मांगा है। नियम के मुताबिक 500 करोड़ तक का बकाया 12 किस्तों में, 1000 करोड़ तक का बकाया 20 किस्तों में, 2000 करोड़ तक का बकाया 28 किस्तों में, 4000 करोड़ तक का बकाया 34 किस्तों में, 10000 करोड़ तक का बकाया 40 और दस हजार करोड़ से अधिक बकाया होने पर 48 किस्तों में भुगतान किया जा सकेगा।
किस कंपनी का कितना रुपया है बकाया
डीवीसी का बकाया 3900 करोड़
एनटीपीसी का बकाया 350 करोड़
आधुनिक पावर का बकाया 350 करोड़
पावर ट्रेडिंग कारपोरेशन का बकाया 400

