आवास के नाम पर सरकारी पैसे का हो रहा है बंदरबांट, विभाग ने साधी चुप्पी,कहीं आवास के नाम पर दुकान, तो कहीं गाय की शेड, शेड के नाम पर बन रहा है गैरेज
प्रमोद उपाध्याय
हजारीबागः हजारीबाग इचाक प्रखंड के नावाडीह पंचायत में इन दिनों आवास एवं सरकारी योजनाओं की राशि का खूब बंदरबांट हो रहा है । तिलरा भुसवा में कई ऐसे कच्चे मकान है जो गिर चुके हैं। फिर भी लोग उसी में किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं। लाभुक कहते हैं कि् गर्मी तो किसी तरह निकल जाएगा, पर बरसात नहीं झेल पाएंगे। टूटे घर में कभी भी हादसा हो सकता है। कई बार मुखिया को आवेदन भी दिए पर कोई सुनवाई नहीं हुई। मुखिया कहते हैं कि सूची में जब नाम आएगा तभी आवास आपको मिल पाएगा जबकि सूची में भी नाम 2011 से दर्ज है
पंचायत प्रतिनिधि एवं पदाधिकारियों की मनमानी भी
वहीं दूसरी ओर पंचायत प्रतिनिधि एवं पदाधिकारियों की मनमानी भी खूब देखी जा रही है। गांव के एक दबंग व्यक्ति जिसका तीन जगहों पर मकान है उसी व्यक्ति को वे आवास दे रहे हैं। जब लाभुक को घर की जरूरत है तो सरकारी आवास को दुकान बना दिया गया है। कई नौकरी पेशा वाले लोगों को भी आवास दिया जा रहा है लेकिन जरूरतमंद को नजरअंदाज कर दिया जा रहा है
गांव के कई लोगों ने पशु रखने के नाम पर लगभग 60,000 रुपए का गाय शेड के नाम पर अपने घर में ही फोर व्हीलर रखने के साथ बैठकी रूम बना चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इंसानियत खत्म हो चुका है लोग अपने स्वार्थ में जी रहे हैं । सरकार का मिशन था गांव का विकास हो एवं जरूरतमंद लोगों को उनके जरूरत के अनुसार योजना का लाभ मिले । सरकार का विशेष अभियान सरकार आपके द्वार चलाया था। इसके तहत कई योजनाओं को भी पास किया गया था । जन अदालत में जाकर लोगों ने अपनी जरूरत के अनुसार गुहार भी लगाई थी । योजना के तहत फंड भी मिला लेकिन पदाधिकारी देना नहीं चाह रहे । इचाक प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी से पूछे जाने पर कहा कि मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।

