गणादेश एक्सक्लूसिवः चौतरफा घिरा झारखंड का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ईडी के साथ एनजीटी भी कर रही जांच
एनजीटी में मुख्य सचिव से कहा कि प्रदूषण बोर्ड से नहीं संभल रहा मामला
रात के अंधेरे में होती है फाइल की डीलिंग, इडी को मिली अहम जानकारी
पैसों का बंटवारा अफसर से लेकर क्षेत्रीय वैज्ञानिकों तक
एनजीटी की भी छह सदस्यीय पहुंची, कर रही है जांच
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव प्रशांत गर्गव के नेतृत्व में हो रही जांच
रांचीः झारखंड का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब चौतरफा घिर गया है। ईडी के साथ अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूल की छह सदस्यीय टीम भी खनन के मापदंडों की जांच कर रही है। एनजीटी की टीम साहेबगंज पहुंच चुकी है। इस टीम का नेतृत्व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव प्रशांत गर्गव कर रहे हैं। इसमें कोलकाता रिजनल ऑफिस के दो सदस्य, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वेयर भी शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि एनजीटी की टीम साहेबगंज में पत्थर खदान व क्रशर प्लांटों की करेगी। वहीं ईडी की जांच की वजह से अवैध खनन का तथाकथित सिंडिकेट चलानेवाले लोग अब साक्ष्य को मिटाने की कोशिश में लगे हुए हैं. वहीं सिंडिकेट कुछ ऐसे खदानों, क्रशरों को रीफिलिंग करने में जुट गये हैं, ईडी को यह भी जानकारी मिली है कि पत्थर खदानों के लीज समाप्त होने के बावजूद अवैध खनन जारी था।
पर्यावरण क्लीयरेंस के नाम पर करोड़ों की उगाही
प्रेम प्रकाश से इडी को मिले इनपुट के आधार पर यह पता चला है कि पर्यावरण क्लीयरेंस के नाम पर करोड़ों की उगाही की जाती थी। इस राशि का बंटवारा प्रदूषण बोर्ड के अफसर से लेकर संबंधित क्षेत्रीय वैज्ञानिकों तक होता था. वहीं यह भी बात सामने आई है कि राज के अंधरे में प्रदूषण बोर्ड का ऑफिस खोल कर कंसेंट टू ऑपरेट और कंस्टेंट टू स्टेबलिशमेंट की स्वीकृति दी जाती है। इसके बदले में अफसरों को मेटी रकम भी मिलती थी। इस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रदूषण बोर्ड के सदस्य सचिव और दुमका क्षेत्रीय कार्यालय के क्षेत्रीय पदाधिकारी द्वारा अवैध माइनिंग को लेकर दायर शपथ पत्र में गलत जानकारी देने को लेकर फटकार भी लगाई थी.
एनजीटी को भी नहीं दी जाती थी सही जानकारी
जांच में यह बात भी सामने आई है कि एनजीटी को भी सही जानकारी नहीं दी जाती थी। जिलों के जिला खनन पदाधिकारी, जिला टास्क फोर्स के सदस्य प्रदूषण बोर्ड के बुलावे पर कभी आते ही नहीं थे, न ही किसी तरह की जानकारी राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद को देते थे. इसको लेकर एनजीटी ने सभी जिलों के डीएमओ स्तर के अधिकारियों को फटकार लगाई थी कि अवैध खनन की सही जानकारी क्यों नहीं दी जाती है. एनजीटी ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वे अवैध खनन मामले में अपनी विशेष निगाहें रखें. प्रदूषण बोर्ड से यह पूरा मामला संभल नहीं रहा है.
विधानसभा में भी उठा था मामला
निर्दलीय विधायक सरयू राय ने झारखंड विधानसभा में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एनजीटी के आदेश के तहत राज्य भर के पत्थर खदानों और क्रशरों का सीटीओ रद्द करने का मामला उठाया। पर्यावरणीय स्वीकृति के शर्तो के उल्लंघन के आधार पर सीटीओ रद्द किया गया था। उन्होंने कहा कि 69 क्रशर बंद किए गए थे, बाद में 23 को खोल दिया गया। आखिर किन नियमों का उल्लंघन करने पर सीटीओ रद्द किया गया था और फिर दोबारा किन नियमों का पालन करने पर उन्हें फिर से खोला गया। सरयू राय ने इसकी जांच के लिए विधानसभा की कमेटी बनाने की मांग की।

