आठ सौ आशा कार्यकर्ताओं को कालाजार पर मिल रहा प्रशिक्षण

अनूप कुमार सिंह।

वैशाली। सदर अस्पताल के प्रशासनिक भवन में कालाजार नियंत्रण के लिए जिले के आशा दीदियों के प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया। शुभारंभ सिविल सर्जन डॉ श्यामनंदन प्रसाद व जिला बीडीसी पदाधिकारी डॉ गुड़िया कुमारी ने संयुक्त रूप से की। कालाजार को नियंत्रण सर्विलांस को सशक्त करने के उद्देश्य से जिला के सभी प्रखंडों के कालाजार प्रभावित क्षेत्रों के कुल 800 आशा कार्यकर्ताओं को 30 -30 के बैच में प्रशिक्षण दिया जाना है। वेक्टर से संबंधित रोगों का प्रशिक्षण वीबीडीसी धीरेंद्र जी, वीडीसीओ राजीव जी, जिला पीरामल लीड पीयूष ने दिया। प्रशिक्षण में कालाजार के लक्षण, संभावित पीकेडीएल की पहचान, जांच, उपचार, बचाव हेतु घर-घर कालाजार नियंत्रणार्थ कीटनाशक दवा का छिड़काव के बारे में डॉ गुड़िया के द्वारा विस्तार से जानकारी देते हुए बताया गया कि हमने कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त कर लिया। वहीं हम शून्य कालाजार की ओर बढ़ रहे हैं।ऐसे में हमारे ऊपर और भी जवाबदेही है कि कोई भी व्यक्ति, जिसे दस दिन से अधिक समय से बुखार है, उसपर नजर रखी जाए।अगर सामान्य उपचार ( एंटीबायोटिक या मलेरिया रोधी दवाओं) से बुखार ठीक नहीं हो रहा तो शीघ्र उनकी कालाजार की जांच कराई जाए और धनात्मक रिपोर्ट आने पर शीघ्र “एकल खुराक एम्बीजोम” से इलाज कराई जानी चाहिए। जिन मरीजों का 2 वर्ष पहले या अगर पहले भी कालाजार का इलाज हुआ है वैसे मरीजों में पीकेडीएल के पहचान के बारे में भी बताया गया। कालाजार के अलावे डेंगू/चिकनगुनिया, मलेरिया, फाइलेरिया तथा मस्तिष्क ज्वर के बारे भी जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण में वीडीसीओ अंकित, अमित और कृष्णदेव जी सहित आशाकर्मी एवम अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे।
सरकार द्वारा रोगी को मिलती है *आर्थिक सहायता:_
वेक्टर नियंत्रण पदाधिकारी डॉ गुड़िया कुमारी ने बताया कालाजार से पीड़ित रोगी को मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में पैसे भी दिए जाते हैं। बीमार व्यक्ति को 6600 रुपये राज्य सरकार की ओर से और 500 रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिए जाते हैं। यह राशि वीएल (ब्लड रिलेटेड) कालाजार में रोगी को प्रदान की जाती है। वहीं चमड़ी से जुड़े कालाजार (पीकेडीएल) में 4000 रुपये की राशि केंद्र सरकार की ओर से दी जाती है।
कालाजार के लक्षण :

  • लगातार रुक-रुक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
  • वजन में लगातार कमी होना।
  • दुर्बलता।
  • मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
  • व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।

– प्लीहा में नुकसान होता है।

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