एक मंदिर जहां भगवान् को पलने में झुलाने के लिए उमड़ती है भीड़
पत्थलगडा (गणादेश) : वैसे तो मंदिरों में देवी देवताओं की पूजा-पाठ और दर्शन करने को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही है। परंतु एक मंदिर ऐसा भी है जहां श्रद्धालुओं की भीड़ भगवान् को पलने में झुलाने के लिए उमड़ती है। यह मंदिर चतरा जिले के पत्थलगडा प्रखण्ड के बरवाडीह गांव में स्थित है। यहां भगवान को पलने में झुलाने के लिए श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है अपितु भगवान को पलने में झुलाने के लिए लोग कतार में खड़े होकर देर तलक अपनी बारी का इंतजार करते हैं। खाश कर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन यहां भगवान् को पलने में झुलाने के लिए पहुचें श्रद्धालुओं की कतार देखते ही बनता है। यहां करीब साढ़े तीन सौ वर्षों से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। यहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव की शुरुआत 17वीं शताब्दी में हुई थी। तिवारी परिवार द्वारा साढ़े तीन सौ साल पहले शुरू की गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव आज भी यहां धूमधाम से मनाया जाता है। 17वीं शताब्दी में यहां तिवारी परिवार द्वारा ठाकुरबाड़ी का निर्माण कराया गया था। ठाकुरबाड़ी में राधा-कृष्ण, सीता-राम व अन्य देवी देवताओं की अष्टधातु से निर्मित प्राचीन मुर्तियां स्थापित हैं। आज भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में यहां तिवारी परिवार द्वारा धूमधाम से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव मनाया जाता है। तिवारी समाज के लोग यहां इकट्ठा होते हैं और भक्ति भाव के साथ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना कर उन्हें पालने में झूलाते हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर ठाकुरबाड़ी मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है। फिर मध्यरात्रि में पूरे तिवारी समाज के लोग इकट्ठा होते हैं और विधिवत वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा अर्चना की जाती है। तत्पश्चात भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप को पालने पर स्थापित कर उन्हें झुलाया जाता है। अगले दिन मंदिर में भगवान को जगाने की भी प्रथा है। उन्हें जागरण कराने के बाद महाप्रसाद का वितरण किया जाता है। यहां प्रसाद पाने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। पूरे कार्यक्रम में महिलाओं द्वारा सोहर व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से संबंधित गीत रात भर गाये जाते हैं। इस बार भी यहां जन्माष्टमी मनाने के लिए विशेष तैयारियां की की गई है।
बनारस से मंगाया जाता है भगवान का वस्त्र
जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर में स्थापित श्रीकृष्ण राधा व अन्य सभी देवताओं की प्रतिमाओं को नये वस्त्र और आभूषण से विभूषित किया जाता है। यहां यह प्रथा आज भी जारी है। भगवान का नये वस्त्र बाबा विश्वनाथ की नगरी बनारस से मंगाया जाता है। बनारस से वस्त्र आने के बाद मंदिर के पुजारी प्रतिमाओं को साफ करते हैं फिर नए वस्त्र धारण करवाते हैं।
अदरक का सोंठ और हल्दी का लड्डू लगता है भोग
जन्माष्टमी के दिन ठाकुरबाड़ी मंदिर में भगवान को अदरक का सोंठ और हल्दी के लड्डू का भोग लगाया जाता है। इसके साथ यहां दूध, दही, मक्खन, चना व विविध प्रकार के पुवा पकवान का भोग लगता है। भगवान को लगाए जाने वाले भोग तिवारी समाज के लोग अपने-अपने घरों में बनाकर दौरा में सजाकर मंदिर लाते हैं। व्रतियों ने किया नहाय-खाय, जन्माष्टमी आज: भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का महापर्व मंगलवार को मनाया जाएगा। व्रती दिनभर उपवास रखेंगे व रात्रि बेला में भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। व्रत को लेकर सोमवार को जन्माष्टमी व्रतियों ने नहाय खाय का रस्म पूरा किया। जन्माष्टमी व्रत को लेकर प्रखंड के बरवाडीह और पत्थलगडा के ठाकुरबाड़ी को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। दोनों स्थानों पर भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। मौके पर विशेष पूजा अर्चना आयोजित की जाती है।
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