31 हजार हेक्टेयर फसल बर्बाद, अब 89 हजार किसानों की नजर मुआवजे पर, नवगछिया सबसे ज्यादा प्रभावित
प्रदीप विद्रोही,भागलपुर: अगस्त के आखिरी सप्ताह की मूसलाधार बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर ने भागलपुर के किसानों के खेतों में ऐसी तबाही मचाई कि खरीफ की 31,260.35 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई। अब खेतों में खड़ी फसल के नुकसान के बाद किसानों की निगाहें सरकारी सहायता पर टिकी हैं। जिला कृषि विभाग ने 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति वाले क्षेत्रों के लिए करीब 51.43 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि का आकलन किया है।
फसल क्षति इनपुट अनुदान के लिए जिले के 89,029 प्रभावित किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। प्रशासनिक स्तर पर आवेदनों की जांच और सत्यापन का काम तेज कर दिया गया है। अब तक 25,787 आवेदनों का निबटारा किया जा चुका है। किसानों तक राहत राशि जल्द पहुंचाने के उद्देश्य से रविवार को अवकाश के बावजूद जिला और प्रखंड कृषि कार्यालय खुले रहे और अधिकारी-कर्मी आवेदनों के सत्यापन में जुटे रहे।
खेतों से फाइल तक पहुंचा नुकसान का आंकड़ा:
अगस्त के अंतिम सप्ताह में हुई अतिवृष्टि और विभिन्न नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि के बाद जिले में बड़े पैमाने पर खेत जलमग्न हो गए थे। कई इलाकों में खेतों में कई दिनों तक पानी जमा रहा। इसका सबसे अधिक असर धान, मक्का और दलहन समेत खरीफ की फसलों पर पड़ा। लंबे समय तक जलजमाव के कारण खेतों में खड़ी फसल गलकर नष्ट हो गई। जिला कृषि विभाग की सर्वेक्षण रिपोर्ट में 31,260.35 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल क्षति का आकलन किया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के निर्धारित मानकों के अनुसार 33 प्रतिशत से अधिक क्षति वाले क्षेत्रों को सहायता के लिए चिह्नित किया गया है। जिलाधिकारी की ओर से 21 सितंबर को कृषि निदेशक, बिहार को विस्तृत प्रतिवेदन भेजा जा चुका है। रिपोर्ट में प्रखंडवार, फसलवार और पंचायतवार 33 प्रतिशत से अधिक प्रभावित क्षेत्र तथा अनुमानित सहायता राशि का ब्योरा शामिल है।
89 हजार आवेदन, सत्यापन में जुटा महकमा:
मुआवजा राशि के लिए बड़ी संख्या में किसानों के आवेदन आने के बाद कृषि विभाग के सामने आवेदनों की जांच भी बड़ी चुनौती बन गई है। विभाग के स्तर से धरातलीय सत्यापन के साथ राजस्व अभिलेखों का मिलान किया जा रहा है।जिला कृषि पदाधिकारी प्रेम शंकर प्रसाद के अनुसार, आवेदनों की जांच पारदर्शिता और तेजी के साथ की जा रही है। जिन किसानों के आवेदन और दस्तावेज जांच में सही पाए जा रहे हैं, उन्हें भुगतान की अगली प्रक्रिया के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं, मानकों के अनुरूप साक्ष्य नहीं मिलने या आवेदन में त्रुटि पाए जाने पर उसे निरस्त किया जा रहा है।
नवगछिया सबसे ज्यादा प्रभावित:
बाढ़ और जलजमाव से जिले के तीनों अनुमंडलों की 15 पंचायतें विशेष रूप से प्रभावित हुई हैं। इनमें नवगछिया अनुमंडल के सात, भागलपुर सदर के पांच और कहलगांव अनुमंडल के तीन क्षेत्र शामिल हैं। नवगछिया अनुमंडल में नारायणपुर, बिहपुर, खरीक, नवगछिया, रंगरा चौक, गोपालपुर और इस्माइलपुर प्रखंड की पंचायतें प्रभावित रहीं। यहां बाढ़ के पानी के कारण खेतों में खड़ी फसलों को व्यापक नुकसान हुआ।
भागलपुर सदर अनुमंडल के गोराडीह, सबौर, नाथनगर, सुल्तानगंज और शाहकुंड प्रखंडों की पंचायतें भी बाढ़ और जलजमाव की चपेट में आईं।वहीं कहलगांव अनुमंडल के पीरपैंती, कहलगांव और सन्हौला प्रखंडों की पंचायतों में भी फसलों को नुकसान हुआ है।
सही आवेदन आगे, त्रुटिपूर्ण होंगे बाहर:
कृषि विभाग का जोर इस बात पर है कि वास्तविक रूप से प्रभावित किसानों तक ही सहायता पहुंचे। इसी कारण आवेदन के ऑनलाइन विवरण के साथ खेत और राजस्व संबंधी रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। जांच में सही पाए जाने वाले आवेदनों को भुगतान की प्रक्रिया में आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र किसानों को सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी।
एक नजर में स्थिति:
*फसल क्षति: 31,260.35 हेक्टेयर
*अनुमानित सहायता राशि: 51.43 करोड़ रुपये
*प्राप्त आवेदन: 89,029
*निबटाए गए आवेदन: 25,787
*विशेष रूप से प्रभावित पंचायतें: 15
*प्रभावित अनुमंडल: नवगछिया, भागलपुर सदर और कहलगांव।विस्तृत रिपोर्ट भेजने की तिथि: 21 सितंबर।


