लोकभवन के सामने मनरेगा कर्मियों ने किया धरना प्रदर्शन, मानदेय बढ़ाने स्थायीकरण करने सहित कई मांग

रांची: झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना पर बैठ गया है। राजधानी रांची स्थित लोक भवन में चल रहे इस धरना में शामिल कर्मी मो यूसुफ ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि वे पिछले 18 वर्षों से बेहद कम मानदेय पर काम कर रहे हैं, जबकि उन्हें किसी प्रकार की बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
धरना दे रहे कर्मियों का कहना है कि संघ द्वारा कई वर्षों से सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण नीति के निर्माण, वेतन संरचना में समानता, समय पर मानदेय भुगतान और कार्य परिस्थितियों में सुधार को लेकर राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाता रहा है। इसके लिए कई बार ज्ञापन सौंपे गए, प्रतिनिधिमंडल स्तर पर वार्ता हुई और लिखित अनुरोध भी किए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
कर्मचारियों ने बताया कि राज्य के कई जिलों में छह महीने से अधिक समय से मानदेय बकाया है, जिससे उनके सामने रोजमर्रा के जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसके साथ ही बिना अतिरिक्त संसाधन और पारिश्रमिक के उन पर लगातार अतिरिक्त कार्यभार डाला जा रहा है।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि सामाजिक सुरक्षा के अभाव में फील्ड स्तर पर कार्यरत कर्मियों को असुरक्षित परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है। इसके कारण अब तक राज्य में करीब 112 मनरेगा कर्मियों की मौत हो चुकी है, लेकिन उनके आश्रितों को किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो वे आंदोलन को और तेज करते हुए भूख हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। धरना पर मौजूद रांची जिला मनरेगा कर्मचारी संघ के सचिव नेजाम अन्सारी, निरोज लकड़ा, मृत्युंजय महतो, अमीता कुमारी, सादीक अख्तर ,अनिता केरकेट्टा, प्रतिमा कुमारी, दया शंकर, जुलियानी बारला, धर्मेन्द्र उरांव अन्य मनरेगा कर्मचारी धरने पर मौजूद थे।

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