कम उम्र में विवाह करने से प्रसव के दौरान जच्चा एवं बच्चा दोनों की जान को खतरा : मनोरंजन कुमार
खूंटी : नालसा एवं झालसा के निर्देशन में बाल विवाह को समाप्त करने हेतु कैंपेन का आरंभ किया गया। इस अवसर पर गुरुवार को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कालामाटी, खूंटी में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष सत्य प्रकाश की अध्यक्षता में विधिक जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया।
उक्त शिविर में डालसा, सचिव मनोरंजन कुमार ने कस्तूरबा की बच्चियों को बाल विवाह से उत्पन्न होने वाली समस्याओं एवं बुराईयों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि 21 साल उम्र से पहले बच्चियों का शरीर शादी के लायक नहीं होता है। कम उम्र में विवाह करने से अधिकतर बच्चियों की मृत्यु गर्भावस्था के दौरान असमय हो जाती है। प्रसव के दौरान जच्चा एवं बच्चा दोनों की जान खतरे में रहती है। उन्होंने कहा कि प्रसव के दौरान न सिर्फ बच्ची अपितु नवजात शिशु की भी मौत हो जाती है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में बच्चियों की शादी होने से उनकी शिक्षा भी अधूरी रह जाती है। इससे उनका सामाजिक एवं वैवाहिक अस्त-व्यस्त हो जाता है।
मौके पर डालसा के रीटेनर अधिवक्ता मुकूल कुमार पाठक ने कहा कि यदि बच्ची के घर-परिवार के लोग या समाज के लोग उनकी शादी 21 वर्ष उम्र से पहले कराने लिए दबाव डालते हैं तो यह कार्य गैर कानूनी होगा और उन पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पीड़ित बच्ची अपने बचाव के लिए कानूनी सहायता ले सकती है। इसके लिए पीड़िता उपायुक्त, एसपी एवं डालसा अध्यक्ष/सचिव के पास जाकर सहायता प्राप्त कर सकती है। इसके अलावा प्रत्येक पंचायत में स्थित विधिक सहायता केंद्र में जाकर पीएलवी को सादे कागज पर आवेदन देकर कानूनी सहायता एवं संरक्षण प्राप्त किया जा सकता है।

